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सोशल मीडिया पर बच्चों के लिए आयु प्रतिबंध पर बहस तेज

ऑस्ट्रेलिया ने अपने यहां लागू किया है यह नियम

बर्लिनः ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित करने या प्रतिबंधित करने के कदम के बाद, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के कानून बनाने की दिशा में बहस तेज हो गई है। यह वैश्विक प्रयास सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते नकारात्मक प्रभावों, जैसे कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, ऑनलाइन उत्पीड़न, और अनुचित सामग्री के संपर्क में आने से बच्चों को बचाने पर केंद्रित है।

विभिन्न देशों की सरकारों और बाल अधिकार संगठनों का तर्क है कि सोशल मीडिया कंपनियाँ जानबूझकर ऐसे एल्गोरिदम का उपयोग करती हैं जो बच्चों को स्क्रीन से चिपके रहने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे उनकी एकाग्रता और सामाजिक विकास पर गहरा असर पड़ता है।

यूरोपीय संघ ने भी डिजिटल सेवा अधिनियम के तहत बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के नियमों को कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों में सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों के डेटा को ट्रैक करने और लक्षित विज्ञापन दिखाने से रोकना शामिल है। कई देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने चिंता व्यक्त की है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में चिंता, अवसाद और आत्मसम्मान की कमी जैसे मनोवैज्ञानिक मुद्दे बढ़ रहे हैं।

माता-पिता भी सरकार से मांग कर रहे हैं कि सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों के अनुकूल सुरक्षित प्लेटफॉर्म प्रदान करने के लिए मजबूर किया जाए, या फिर उनकी पहुँच को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस मुद्दे पर मुख्य चुनौती यह है कि बच्चों की वास्तविक उम्र को ऑनलाइन कैसे सत्यापित किया जाए। टेक कंपनियाँ अक्सर गोपनीयता के उल्लंघन का हवाला देते हुए कड़े आयु सत्यापन तंत्रों का विरोध करती हैं।

हालाँकि, कई देशों के नियामक अब प्रौद्योगिकी कंपनियों को बाध्य करने के लिए डिजिटल आईडी या अन्य सत्यापन प्रणालियों का उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं। इस वैश्विक आंदोलन का उद्देश्य केवल पहुँच को प्रतिबंधित करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा ऑनलाइन वातावरण बनाना है जहाँ बच्चे सुरक्षित रूप से बातचीत कर सकें और सीख सकें।

यह बहस इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे डिजिटल युग में बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य और नीतिगत चुनौती बन गया है। विभिन्न सरकारों द्वारा उठाए जा रहे ये कदम एक स्पष्ट संकेत हैं कि वे अब सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफार्मों पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेह ठहराने को तैयार हैं।