रांची: जेएलकेएम के नेतृत्व में निकाली गई छात्र अधिकार पदयात्रा में मंगलवार को उस समय हंगामा मच गया, जब विधानसभा परिसर से पहले ही पुलिस प्रशासन ने इसे रोक दिया. यह पदयात्रा पार्टी के नेता देवेंद्र नाथ महतो की अगुवाई में निकाली गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा और संगठन के कार्यकर्ता शामिल थे.
पदयात्रा जैसे-जैसे विधानसभा की ओर बढ़ रही थी, प्रतिभागियों का उत्साह भी बढ़ता जा रहा था. लेकिन विधानसभा से पहले ही सुरक्षा बलों ने बैरिकेड लगाकर यात्रा को आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और मौके पर जमकर हंगामा किया.
छात्र हितों पर सरकार चुप क्यों?
जेएलकेएम से जुड़े छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य में छात्र हित से जुड़े कई मसले लंबे समय से लंबित हैं. उनका आरोप है कि राज्य में सरकारी नौकरियों की बहाली रुकी हुई है, नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हो रही है, कई प्रतियोगी परीक्षाएं समय पर नहीं हो पा रही हैं और छात्रवृत्ति के मामलों में भी गंभीर अनियमितताएं हैं.
मौके पर मौजूद कई छात्रों ने कहा कि राज्य में रोजगार की स्थिति चिंताजनक है. नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं होने से लाखों युवा प्रभावित हो रहे हैं. सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं दिख रहा है.
हमारी आवाज नहीं रोकी जा सकतीः देवेंद्र नाथ महतो
नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि पदयात्रा का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाना था. उन्होंने कहा छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. नियुक्ति नहीं, छात्रवृत्ति नहीं, परीक्षाओं में देरी इन सब पर सरकार मौन है. विधानसभा तक पहुंचकर हम अपना पक्ष रखना चाहते थे, लेकिन हमें रोका गया. इससे छात्रों की आवाज और बुलंद होगी. उन्होंने आगे कहा कि जेएलकेएम आने वाले दिनों में और बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी करेगा.
पदयात्रा बनी राजनीतिक चर्चा का मुद्दा
विधानसभा से पहले पदयात्रा को रोकने की घटना ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है. छात्र संगठनों से लेकर विपक्षी दलों तक, कई समूह सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. जेएलकेएम ने साफ कहा है कि उनकी लड़ाई छात्रों के अधिकारों के लिए है और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक राज्य में लंबित नियुक्तियां, छात्रवृत्ति और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता.