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हाई पॉल्यूशन वाले इलाकों में बच्चों की केयर कैसे करें? पेरेंट्स न करें ये 5 गलतियां जो बढ़ाती हैं गंभीर इंफेक्शन का खतरा, डॉक्टरों की सलाह

देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. प्रदूषण का असर नवजात बच्चों पर भी हो रहा है. अस्पतालों मे ऐसे केस आ रहे हैं जहां जन्म के साथ ही बच्चे को सांस संबंधी परेशानियां हो रही हैं. डॉक्टर इसका एक बड़ा कारण पॉल्यूशन को बता रहे हैं. ऐसे में हाई पॉल्यूशन वाले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए नवजात शिशु की देखभाल बहुत जरूरी है.

डॉक्टर कहते हैं कि जन्म के पहले 30 दिन बच्चे के लिए सबसे नाज़ुक होते हैं, क्योंकि इस समय उसका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता और प्रदूषित हवा में मौजूद धूल, स्मॉग, धुआं और टॉक्सिक कण उसके फेफड़ों पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं. ऐसे इलाकों में पैदा होने वाले बच्चों को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है. इसलिए शुरुआती दिनों से ही उनकी देखभाल पर खास ध्यान देना जरूरी है, ताकि उनका शरीर सुरक्षित रहे और उनकी ग्रोथ प्रभावित न हो. आइए इस बारे में जानते हैं.

नवजात बच्चों को प्रदूषण से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. हाई पॉल्यूशन वाली हवा के कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत, खांसी, सीने में जकड़न, आंखों में जलन और बार-बार इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. इस उम्र में उनका इम्यून सिस्टम बेहद कमजोर होता है, इसलिए मामूली प्रदूषण भी उनके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं, डिलीवरी के बाद मां की इम्यूनिटी भी कमजोर रहती है, जिससे किसी भी प्रकार का संक्रमण जल्दी बच्चे तक पहुंच सकता है. ऐसे में प्रदूषित वातावरण में नवजात शिशु की देखभाल में छोटी-सी लापरवाही भी उसके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए अधिक सावधानी जरूरी है.

हाई पॉल्यूशन वाले इलाकों में जन्मे नवजात बच्चों की कैसे करें केयर?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि नवजात बच्चों पर भी प्रदूषण का गंभीर असर देखा जा रहा है. बच्चों में अस्थमा, सीओपीडी जैसी समस्याएं हो रही है. ऐसे में अस्पताल से छुट्टी के बाद भी बच्चे की विशेष केयर जरूरी है.

डॉ घोटेकर कहते हैं कि प्रदूषित इलाकों में जन्मे नवजात शिशुओं की देखभाल का पहला कदम घर की हवा को सुरक्षित बनाना है. बच्चे का कमरा हमेशा साफ-सुथरा और हवादार होना चाहिए. एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और रोज हल्की सफाई करें ताकि हवा में मौजूद कण कम हों. बच्चे को गर्म और मुलायम कपड़े पहनाएं, लेकिन ओवरड्रेसिंग से बचें.

बाहर ले जाने से पहले मौसम और AQI जरूर देखें और कोशिश करें कि पहले 30 दिनों में नवजात को भीड़ और ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में बिल्कुल न ले जाएं. कमरे में धूम्रपान, अगरबत्ती या किसी भी तरह का धुआं बिल्कुल न होने दें. बच्चे को केवल साफ हाथों से पकड़ें और विज़िटर्स को सीमित करें ताकि संक्रमण का खतरा कम रहे.

पहले महीने में नवजात बच्चों की देखभाल में कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?

डॉ. एल.एच. घोटेकर ने बताया कि अक्सर माता-पिता अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो प्रदूषित इलाकों में नवजात के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ा देती हैं. जैसे बच्चे को बार-बार बाहर ले जाना, घर में धूल जमा होने देना, कमरे में धुआं या खुशबूदार प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना या बहुत से लोगों को बच्चे को छूने देना.

कई बार घर में आने वाले मेहमान बिना हाथ धोए बच्चे को पकड़ लेते हैं, जिससे संक्रमण आसानी से फैलता है. बच्चे को जरूरत से ज्यादा नहलाना भी त्वचा को कमजोर कर देता है. पहले महीने में नवजात को भीड़भाड़, ट्रैफिक, कंस्ट्रक्शन कार्य वाले क्षेत्रों या प्रदूषण की अधिक मात्रा वाली जगहों पर बिल्कुल न ले जाएं. साथ ही, ओवरकपड़े पहनाने या कमरे को बहुत ठंडा रखने से भी सांस संबंधित दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

नवजात बच्चों के लिए यह भी जरूरी

कमरे में हल्की नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें.

बच्चे के आसपास धूल जमा न होने दें, बिस्तर रोज़ बदलें.

मां का दूध नियमित रूप से पिलाएं, यह इम्यून सिस्टम मजबूत करता है.

बच्चे के कमरे में पौधे, धुआं, परफ्यूम और केमिकल स्प्रे से बचें.

हाथ, कपड़े और बच्चे का स्थान हमेशा साफ रखें.

नवजात को केवल सीमित, स्वस्थ और साफ-सुथरे लोगों को ही पकड़ने दें.