देश के परिवहन उद्योग पर विभागीय मंत्री का बयान
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक दूरदर्शी बयान दिया है कि भारत का इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये का एक विशाल बाजार बनने की क्षमता रखता है। यह अनुमान भारत के ऊर्जा परिवर्तन और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के लिए एक मजबूत संकेत है।
गडकरी ने जोर देकर कहा कि यह विकास केवल निजी कारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें इलेक्ट्रिक बसें, वाणिज्यिक बेड़े (ट्रक और डिलीवरी वैन), और दोपहिया व तिपहिया वाहन भी शामिल होंगे। सरकार इस विशाल वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप कर रही है, जिनमें फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के तहत सब्सिडी, और उन्नत रसायन सेल बैटरी निर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना शामिल है।
मंत्री ने भविष्य के ईंधन स्रोत के रूप में ग्रीन हाइड्रोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि सरकार इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन चला रही है, जो इलेक्ट्रिक बैटरी प्रौद्योगिकी के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हालांकि, इस वृद्धि के साथ चुनौतियाँ भी जुड़ी हुई हैं, जैसे कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार, उच्च प्रारंभिक लागत, बैटरी कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता, और उपयोग की गई बैटरियों का उचित पुनर्चक्रण । गडकरी के अनुसार, यह बाजार केवल परिवहन को नहीं बदलेगा, बल्कि यह लाखों ग्रीन जॉब्स पैदा करके भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम देगा, जिससे भारत दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है। उनका विज़न भारत को जीवाश्म ईंधन आयात पर शून्य निर्भरता वाला देश बनाना है, और ईवी बाजार का यह विस्तार उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक केंद्रीय स्तंभ है।