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छह जातीय समूहों को एसटी का दर्जा देने पर बवाल

बीटीसी कार्यालय पर छात्रों ने धावा बोला

  • मंत्रियों के समूह का वर्गीकरण का सुझाव

  • जीओएम रिपोर्ट की प्रतियां जलायी गयी

  • नागांव में बेदखली अभियान अब भी जारी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम कैबिनेट द्वारा छह समुदायों, ताई अहोम, चुटिया, मारन, मटक, कोच-राजबोंगशी और चाय जनजाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने संबंधी रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य में व्यापक विरोध और तनाव फैल गया है। बोडोलैंड विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस फैसले के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया।

शनिवार को छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर से बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) सचिवालय तक मार्च निकाला और सचिवालय परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने फर्नीचर और कुर्सियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थानीय पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्के बल का प्रयोग किया। छात्रों ने कैबिनेट के फैसले के विरोध में परिसर में तीसरे सेमेस्टर की अंतिम परीक्षा का भी बहिष्कार किया।

इसी क्रम में, रविवार को कामरूप जिला राभा छात्र संघ के सदस्यों ने भी बोको में राष्ट्रीय राजमार्ग 17 को अवरुद्ध कर सरकार विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि छह समुदायों को एसटी दर्जा देने से राज्य के स्वदेशी एसटी समूहों के संवैधानिक अधिकारों को खतरा होगा और उन्होंने मंत्रियों के समूह (जीओएम) की रिपोर्ट की प्रतियां भी जलाईं, जो आदिवासी आबादी में बढ़ती नाराजगी का संकेत देता है।

हिंसा की घटना के बाद, कोकराझाड़ जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बीटीसी सचिवालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू कर दी है ताकि कानून और व्यवस्था बहाल की जा सके।

इस बीच, एसटी दर्जे की लंबित मांगों को पूरा करने के उद्देश्य से, राज्य मंत्रिमंडल ने मंत्रियों के एक समूह की रिपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसमें एसटी (मैदानी), एसटी (पहाड़ी) और एसटी (घाटी) के तीन-स्तरीय वर्गीकरण का प्रस्ताव दिया गया है। नई एसटी (घाटी) श्रेणी में ही उपर्युक्त छह समुदायों को शामिल करने की सिफारिश की गई है। इस प्रस्ताव को प्रभावी बनाने के लिए संसद के एक विशेष अधिनियम की आवश्यकता होगी।

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