Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
संसद के मानसून सत्र का आधा सफर पूरा, आखिरी 9 दिनों में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें पीएम मोदी ने मैसूर में किया 'विवेक स्मारक' का उद्घाटन: बोले- "भारतीय युवाओं के सामर्थ्य से तेजी से ब... तमिलनाडु पहुंचे राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला, बोले— "परिसीमन से तमिल जनता की राजनीतिक ताकत छीन... वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज, धार्मिक भावनाएं आहत करने क... NSA अजीत डोभाल 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित, अमित शाह बोले- "सुरक्षा इतिहास म... राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नई SIT का कड़ा एक्शन, 200 से अधिक लोगों को पुलिस का नोटिस जारी पटियाला में राजा वड़िंग के कार्यक्रम में भारी हंगामा, चन्नी समर्थकों ने लगाए 'चन्नी जिंदाबाद' के नार... उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास पर दुष्कर्म की FIR: शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म का आरोप, B... उत्तराखंड में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, मसूरी के लक्ष्मणपुरी में कथित अवैध नमाज स्थल पर चला बुलडोजर 'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E-20' में गरजे अरविंद केजरीवाल, केंद्र सरकार के सामने रखीं 3 प्रमुख मांगें

पक्षपात के आरोपों से घिरे चुनाव आयोग से नया सवाल

ममता बनर्जी ने पत्र में दो फैसलों पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को एक तीखा पत्र लिखकर चुनाव आयोग के हालिया दो फैसलों पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या ये निर्णय किसी विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने के इरादे से लिए जा रहे हैं, जो चुनाव की निष्पक्षता को खतरे में डालता है। मुख्यमंत्री ने सीईसी से इन मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

बनर्जी की आपत्ति का पहला मुख्य बिंदु राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारियों को जारी किया गया वह निर्देश है, जिसमें उन्हें चुनावी कार्यों, विशेष रूप से मतदाता सूची संशोधन (SIR) और डेटा कार्यों के लिए संविदा पर डेटा-एंट्री ऑपरेटरों और बांग्ला सहायता केंद्र के कर्मचारियों को नियुक्त करने से मना किया गया है।

इसके बजाय, सीईओ कार्यालय ने एक बाहरी एजेंसी के माध्यम से एक वर्ष के लिए 1,000 डेटा एंट्री ऑपरेटरों और 50 सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की भर्ती के लिए निविदा जारी की है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने इस कदम के समय और औचित्य पर संदेह जताते हुए कहा कि जब जिला कार्यालयों में पहले से ही सक्षम कर्मी उपलब्ध हैं, तो एक साल के लिए बाहरी एजेंसी को यह काम सौंपने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने इसे निहित स्वार्थों को साधने की कोशिश बताया।

उनकी दूसरी आपत्ति निजी आवासीय परिसरों के अंदर मतदान केंद्र स्थापित करने के कथित प्रस्ताव पर थी। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि मतदान केंद्र स्थापित करने के स्थापित मानदंडों का उल्लंघन करते हुए ऐसे निजी स्थानों का उपयोग करने से निष्पक्षता पर समझौता हो सकता है और निवासियों व आम जनता के बीच भेदभाव की भावना पैदा हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की गरिमा और विश्वसनीयता हर हाल में अक्षुण्ण रहनी चाहिए और इन दोनों संवेदनशील मुद्दों की गहन, निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच की जानी चाहिए।