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चेहरा है या चांद खिला है.. .. .. ..

चेहरा पहले शायद लोग भूल गये थे पर एक पत्र ने सबके चेहरे और उन चेहरों पर लगे चेहरे उजागर कर दिये। कमाल का हो गया है अपना मीडिया भी। भाई पहले ही बता देते कि यह भाजपा के लोग हैं। यह बताने की जरूरत क्या था कि यह देश के बुद्धिजीवी हैं जो विभिन्न पदों पर नौकरी कर चुके हैं।

यही लिखना था तो साथ में यह भी लिख देते कि आधे तो पहले ही भाजपा के सदस्य बन गये थे, जो बाकी हैं, उनमें से अनेक पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले चल रहे हैं। छिपाने की जरूरत क्या था। भले ही एक दिन का माहौल बना पर उसके बाद क्या हुआ। बेचारे गुप्ता जी, अपना ट्विटर (एक्स)हैंडल बंद कर भाग गये लेकिन तब तक भाई लोगों ने उनकी कारगुजारियों का पुलिंदा देश के सामने तो परोस दिया था। बाकी कथित बुद्धिजीवियों में से कौन किस भ्रष्टाचार के मामले में फंसा है, उसकी पुरानी फाइलें भी सामने आने लगी।

ऐसा मान सकते हैं कि वैकल्पिक मीडिया और आम लोग भी ज्यादा समझदार हो गये हैं। किस नौकरशाह ने अपनी नौकरी में क्या घोटाला किया, बेचारे गुप्ता जी सुंदर लड़कियों की तस्वीरों पर क्या टिप्पणी किया करते थे, सारा मामला बाहर निकला। दूसरी तरफ 175 लोगों की एक और टोली ने इस किस्म के पत्र का विरोध करते हुए दूसरा पत्र भी जारी कर दिया। ऐसा तब हुआ जबकि कई पूर्व चुनाव आयुक्तों ने वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर पहले ही संदेह व्यक्त कर दिया था।

इसी बात पर वर्ष 1985 में बनी फिल्म सागर का यह गीत याद आने लगा है। यह गीत हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और मनमोहक गीतों में से एक है। यह अभिनेता ऋषि कपूर द्वारा डिंपल कपाड़िया के लिए गाए जाने वाले दृश्य में फिल्माया गया है। इस गीत को लिखा था जावेद अख्तर ने और संगीत में ढाला था आर डी बर्मन ने। इसे किशोर कुमार ने अपना स्वर प्रदान किया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

चेहरा है या चाँद खिला है ज़ुल्फ़ें हैं या रात का साया

ऐसी हसीन आज़ादियाँ ऐसी हसीन आज़ादियाँ ऐसी हसीन आज़ादियाँ

सागर जैसी आँखों वाली ये तो बता तेरा नाम है क्या

सागर जैसी आँखों वाली ये तो बता तेरा नाम है क्या

तू क़यामत है तू क़यामत है, तू क़यामत है तू क़यामत है,

तू क़यामत है तू क़यामत है तू क़यामत है

शायर मैं हूँ, शायरी तू आशिक़ मैं हूँ, आशिक़ी तू तुझपे मरूँ

मरने से कहूँ तुझसे मोहब्बत की मैंने

तेरी अदाएँ, मेरी ख़ुशबू तू मेरे दिल की हर धड़कन में दिल में छुपा लूँ

आँखों में बसा लूँ तेरे क़दमों में दुनिया लुटा दूँ

सागर जैसी आँखों वाली ये तो बता तेरा नाम है क्या

सागर जैसी आँखों वाली ये तो बता तेरा नाम है क्या

तू क़यामत है तू क़यामत है, तू क़यामत है तू क़यामत है,

तू क़यामत है तू क़यामत है तू क़यामत है

सागर जैसी आँखों वाली ये तो बता तेरा नाम है क्या

तो भइया सही में माजरा क्या है, इसे समझना ज्यादा जरूरी है। क्या यह मान लिया जाए कि भाजपा के साइबर सेल को यह बात समझ में आ चुकी है कि बार बार आलू से सोना वाला वीडियो अब के दौर में काम नहीं करता है। दिल्ली में बम फटा तो गैर जैविक महामानव भूटान चले गये और पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप को वह नाराज नहीं करना चाहते हैं। बेचारे दक्षिण अफ्रीका भी तभी गये जब इस बात की पुष्टि हो गयी कि वहां डोनाल्ड ट्रंप नहीं आ रहे हैं। विरोधी और खास तौर पर राहुल गांधी भी बार बार यही कह रहे हैं कि अपने पीएम दरअसल डोनाल्ड ट्रंप के किसी वजह से डरते हैं। खैर अंदर की बात जो भी हो पर इतना समझा जा सकता है कि वोट चोरी के आरोप बार बार निशाने पर सटीक लग रहे हैं। गनीमत है कि संवैधानिक संस्थानों के शीर्ष पर सारे कमजोर लोग बैठे हैं। अगर कोई टी एन शेषण जैसा व्यक्ति होता तो अब तक अक्ल ठिकाने आ चुकी होती।

राहुल गांधी के खिलाफ जिनलोगों ने पत्र लिखा है, उनमें सोलह सेवानिवृत्त जज, 123 पूर्व नौकरशाह और 133 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी शामिल हैं। चूंकि नाम सामने आ गया है जो धीरे धीरे यह राज भी खुलता जाएगा कि जिनके चेहरों पर से नकाब अब तक नहीं उतरा है, उनकी भी क्या कुछ मजबूरियां हैं, जिसकी वजह से वे लोकतंत्र के ध्वस्त होने का इस तरीके से समर्थन कर रहे हैं। वैसे अब तक किसी ने पूर्व चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की तलाश नहीं की, यह भी बड़ा सवाल है। अगर देशभक्त हैं तो कमसे कम पूर्व चुनाव आयुक्त को अब जनता के सामने आकर कमसे कम अपना चेहरा ही दिखा देना चाहिए।