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चीन ने राफेल के खिलाफ चलाया ऑपरेशन

अमेरिकी रिपोर्ट से चीन की साजिशों का हुआ खुलासा

वाशिंगटनः अमेरिकी कांग्रेस को द्विदलीय रिपोर्ट देने वाले एक प्रमुख थिंक-टैंक, यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में खुलासा किया है कि चीन ने अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को साधने के लिए एक सुनियोजित सूचना युद्ध अभियान चलाया था। इस गुप्त ऑपरेशन को चीनी साइबर और सूचना इकाई द्वारा ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया था, जिसका सीधा निशाना फ्रांसीसी एयरोस्पेस दिग्गज डसॉल्ट एविएशन का सफल लड़ाकू विमान, राफेल था।

चीन का प्राथमिक उद्देश्य राफेल को अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में बदनाम करना और उसकी बिक्री को कमजोर करना था, ताकि वह अपने घरेलू रूप से विकसित फाइटर जेट्स, विशेष रूप से नवीनतम पीढ़ी के शेनयांग जे-35, के लिए रास्ता बना सके। रिपोर्ट के अनुसार, चीन मानता है कि वैश्विक रक्षा बाजार में राफेल एक प्रमुख बाधा है।

इस दुष्प्रचार अभियान की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का व्यापक उपयोग किया गया। चीनी इकाइयाँ ए आई -जनरेटेड डीपफेक वीडियो, फर्जी ऑडियो क्लिप और हजारों फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल का उपयोग कर रही थीं। इन ए आई-निर्मित सामग्री का केंद्र राफेल के बारे में झूठी और नकारात्मक कहानियाँ फैलाना था। इनमें विमान के सुरक्षा प्रणालियों में काल्पनिक खामियाँ, महंगे और जटिल रखरखाव की लागतें, और यहाँ तक कि इंजन की विफलता जैसे झूठे दावे शामिल थे।

रिपोर्ट ने एक मामले की ओर इशारा किया, जहाँ ऑपरेशन सिंदूर के कारण एक प्रमुख खरीददार देश (जिसका नाम गोपनीय रखा गया है) में राफेल जेट के लिए चल रही बातचीत अचानक रुक गई थी। इस सूचनात्मक हस्तक्षेप ने स्पष्ट कर दिया कि चीन अब सिर्फ आर्थिक प्रतिस्पर्धा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह रक्षा क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धी देशों की छवि और विश्वसनीयता को नष्ट करने के लिए डिजिटल और साइबर उपकरणों का उपयोग कर रहा है।

यह रिपोर्ट भारत जैसे देशों के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जो राफेल विमानों का एक बड़ा उपयोगकर्ता है और जिसके चीन के साथ सीमा विवाद चल रहे हैं। सूचना युद्ध का यह नया मोर्चा दिखाता है कि भू-राजनीतिक संघर्ष अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि सूचना के क्षेत्र में भी लड़ा जा रहा है, जहाँ AI दुष्प्रचार को बड़े पैमाने पर और अविश्वसनीय गति से फैला सकता है। आयोग ने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया है कि वे चीन की इस दुर्भावनापूर्ण गतिविधि को रोकने के लिए सामूहिक रणनीति बनाएँ।