कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट को रद्द किया
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण झटका देते हुए ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स (रैशनलाइज़ेशन एंड कंडीशंस ऑफ़ सर्विस) एक्ट 2021 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-जजों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मत फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि यह अधिनियम शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अधिनियम के तहत विभिन्न न्यायाधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को तय करने का अधिकार कार्यपालिका को दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप माना। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह अधिनियम पहले के न्यायिक फैसलों को दरकिनार करने का एक प्रयास था, जिसमें न्यायालय ने ट्रिब्यूनल सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश दिए थे।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायाधिकरणों को कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए ताकि वे निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। इस अधिनियम में ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए न्यूनतम आयु और कार्यकाल की शर्तें निर्धारित की गई थीं, जिन्हें कोर्ट ने मनमाना बताया। विशेष रूप से, कोर्ट ने पाया कि अधिनियम ने न्यायिक सदस्य की नियुक्ति के लिए अनुभव की आवश्यकताओं को कम कर दिया था, जिससे न्यायाधिकरणों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता था।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि वह बार-बार ऐसे कानून ला रही है जो कोर्ट के पूर्व फैसलों के विपरीत हैं। इस फैसले के बाद, अब सरकार को न्यायाधिकरणों के लिए नए सिरे से कानूनी ढांचा तैयार करना होगा, जो संविधान और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप हो। ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 का उद्देश्य विभिन्न ट्रिब्यूनलों को मिलाकर प्रशासनिक बोझ को कम करना और कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करना था, लेकिन कानूनी पहलुओं पर खरा न उतरने के कारण इसे रद्द कर दिया गया।