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घाटशिला में हेमंत ने बताया कोई नहीं है टक्कर में

रामदास सोरेन के स्थान पर उनके पुत्र की ताजपोशी

  • चंपई सोरेन का प्रभाव काम नहीं कर पाया

  • भाजपा के तमाम अन्य नेता भी फुस्स हो गये

  • अब मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा और तेज हुई

राष्ट्रीय खबर

रांचीः घाटशिला (झारखंड) विधानसभा उपचुनाव का परिणाम अत्यंत निर्णायक रहा, जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन ने शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत ने न केवल उनके राजनीतिक करियर को मजबूती दी है, बल्कि राज्य की राजनीति में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रभाव को भी एक बार फिर स्थापित किया है।

सोमेश चंद्र सोरेन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को 38,601 वोटों के एक विशाल अंतर से पराजित किया। बाबूलाल सोरेन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र हैं। चंपई खुद भी झामुमो छोड़कर भाजपा में चले गये हैं। भाजपा को यह उम्मीद थी कि उनके पार्टी में आने से सिंहभूम के झामुमो वोट बैंक पर असर पड़ेगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं है। यह अंतर दर्शाता है कि घाटशिला निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं ने सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में गहरा विश्वास व्यक्त किया है।

मतगणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, विजेता और उपविजेता उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त मतों का विवरण इस प्रकार है। सोमेश चॆदेर सोरेन को 1,04,936 और उपविजेता बाबूलाल सोरेन को 66,335 वोट मिले हैं। इससे जीत का अंतर 38,601 बनता है।  सोमेश चंद्र सोरेन ने कुल 1,04,936 मत प्राप्त करके न केवल जीत दर्ज की, बल्कि घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में एक नया चुनावी इतिहास भी रचा है। वह इस निर्वाचन क्षेत्र से एक लाख से अधिक वोट प्राप्त करने वाले पहले विधायक बन गए हैं। यह उपलब्धि उनकी लोकप्रियता और क्षेत्र में पार्टी के मजबूत आधार का प्रमाण है।

इस उपचुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा की जीत कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह जीत ऐसे समय में आई है जब राज्य में आगामी राजनीतिक उलटफेर की सुगबुगाहट है, और यह सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला कदम है। इस बड़े अंतर से जीत हासिल करना यह भी संकेत देता है कि क्षेत्र की जनता ने राज्य सरकार के कार्यों और नीतियों का अनुमोदन किया है।

भारतीय जनता पार्टी के लिए, यह परिणाम एक बड़ा झटका है और उन्हें अपनी चुनावी रणनीति तथा जमीनी स्तर पर संगठन की कमजोरी का मूल्यांकन करने के लिए मजबूर करेगा। भाजपा के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, अनुभवी नेता होने के बावजूद, सोमेश चंद्र सोरेन की लहर का सामना नहीं कर पाए।

अब माना जा रहा है कि अपने स्वर्गीय पिता रामदास सोरेन के स्थान पर सोमेश को भी मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा। इससे सिंहभूम का प्रतिनिधित्व सठीक होगा। दूसरी तरफ कैबिनेट से राजद कोटा के कौन से मंत्री को हटाया जाएगा, इस पर फिलहाल अटकलबाजी का दौर जारी है।