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अब भी महागठबंधन में उलझी हुई है गांठ

बिहार विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष होगा

  • राजद ने अब तक जारी नहीं की सूची

  • गुपचुप टिकट वितरण की बात उजागर

  • कुटुंबा सीट पर सीधा संघर्ष स्पष्ट हुआ

राष्ट्रीय खबर

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच, विपक्षी दलों के महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर गतिरोध अभी भी बना हुआ है। चुनाव के दूसरे चरण के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है और इसमें अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन महागठबंधन के सबसे बड़े घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।

इस बार बिहार चुनावों में महागठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल को लेकर जैसी उलझन और खींचतान देखने को मिली है, वैसी पहले शायद ही कभी दिखी हो। पहले चरण की 121 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि समाप्त हो जाने के बावजूद, विपक्षी दलों के गठबंधन में सीटों पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। इस विकट स्थिति के कारण कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष की संभावना बलवती हो गई है, जहाँ गठबंधन के सहयोगी दल ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते दिखेंगे।

दूसरे चरण के नामांकन की प्रक्रिया ज़ोर पकड़ चुकी है, और राजद ने भले ही औपचारिक सूची जारी न की हो, लेकिन जमीनी स्तर पर टिकट वितरण और उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल करने का काम गुपचुप तरीके से चल रहा है। यह असामान्य स्थिति गठबंधन के भीतर गहरे मतभेदों और संवादहीनता को दर्शाती है।

विभिन्न सीटों पर सहयोगी दलों के बीच सीधे टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, लालगंज विधानसभा सीट पर राजद और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवार मैदान में ताल ठोकते नज़र आ रहे हैं। इसी तरह, कुटुंबा सीट पर भी बड़ा पेंच फंसा है, जहाँ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के सामने स्वयं राजद ने सुरेश पासवान को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी अखाड़े में उतार दिया है।

सीटों को लेकर यह खींचतान यहीं खत्म नहीं होती। सिकंदरा जैसी महत्वपूर्ण सीट पर भी राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों को लेकर अनसुलझा विवाद है। वहीं, वारसलीगंज में भी दोनों प्रमुख सहयोगी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं—राजद ने अनिता देवी को और कांग्रेस ने सतीश कुमार सिंह को पार्टी का सिंबल थमा दिया है।

करीब 8 ऐसी सीटें हैं, जहाँ महागठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे की गांठ अब तक नहीं खुल पाई है। इन सीटों पर राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस, तेजस्वी यादव की राजद, और वामपंथी दलों के उम्मीदवार सीधे तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ उतर सकते हैं, जिससे गठबंधन की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के अलावा विकासशील इंसान पार्टी और वामपंथी दल शामिल हैं।

इस अंदरूनी कलह से नाराज़ होकर, झारखंड मुक्ति मोर्चा, जिसे महागठबंधन में जगह नहीं मिली, उसने बिहार में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और पहले ही छह सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं, जिससे विपक्षी वोटों का और अधिक बँटवारा होने की आशंका है।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण के लिए मतदान 11 नवंबर को होना है, जबकि वोटों की गिनती (मतगणना) 14 नवंबर को होगी। गठबंधन में जारी यह अनिश्चितता, चुनाव परिणामों पर सीधा असर डाल सकती है और एनडीए को सीधा लाभ पहुँचा सकती है।