राशन कार्ड और लाभार्थी आधार से जुड़ेः प्रह्लाद जोशी
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राशन कार्डों को डिजिटल बनाया गया
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99 प्रतिशत लाभार्थी आधार से जुड़े हैं
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ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार काम हो रहा है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हाल ही में भारत के खाद्य और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में हुए बड़े सुधारों पर प्रकाश डाला। एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए, उन्होंने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों का जिक्र किया। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि भारत में 100 प्रतिशत राशन कार्डों को डिजिटल कर दिया गया है।
यह एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि देश भर के 99 प्रतिशत लाभार्थियों को उनके आधार नंबर से जोड़ा जा चुका है। यह कदम फर्जी लाभार्थियों को खत्म करने और यह सुनिश्चित करने में सहायक रहा है कि सब्सिडी का लाभ केवल योग्य लोगों तक ही पहुँचे।
जोशी ने कहा कि इस तरह के सुधारों से आम लोगों और व्यवसायों दोनों को बड़ी राहत मिली है। मंत्री का बयान ऐसे मौके पर आया है जब चुनाव आयोग ने आधार को नागरिक होने का प्रमाण मानने से इंकार कर दिया है। बिहार के एसआईआर के दौरान इस मुद्दे पर यह मामला सुप्रीम कोर्ट के चौखट तक जा पहुंचा है, जिसमें अदालत के निर्देश पर आधार कार्ड को भी एक दस्तावेज के तौर पर स्वीकार करने का निर्देश दिया गया है।
जोशी ने कहा कि सरकार ने अनुपालन की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया है। इसके साथ ही, इनपुट क्रेडिट रिफंड की ऑनलाइन प्रणाली ने व्यवसायों के लिए काम करना आसान बना दिया है। इस तरह के कदम कारोबार करने की आसानी को बढ़ावा देते हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में, उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों और समाधानों पर बात की।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार अहस्ताक्षरित बिजली खरीद समझौतों से जुड़ी समस्याओं को हल करने पर काम कर रही है। उन्होंने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों से सहयोग करने का आग्रह किया है और कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस पर पैनी नजर रख रहा है। जोशी ने यह भी बताया कि राज्य विद्युत नियामक निकाय कभी-कभी इसमें बाधाएँ उत्पन्न करते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने पीएम-कुसुम और पीएम-सूर्य घर जैसी प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा योजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि पीएम-कुसुम योजना को शुरुआत में कम भागीदारी मिली थी, लेकिन अब सरकार पीएम-कुसुम 2.0 नामक एक संशोधित संस्करण पर काम कर रही है। इसका लक्ष्य कृषि क्षेत्र को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
जोशी ने इन योजनाओं के रोजगार सृजन के प्रभाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम-कुसुम और पीएम-सूर्य घर ने पहले ही 12-13 लाख नौकरियां पैदा की हैं। पीएम-सूर्य घर योजना के तहत 65 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। वहीं, पीएम-कुसुम के तहत, सरकार खाली या बंजर जमीन को किराए पर लेकर सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की योजना बना रही है। यह न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का एक नया स्रोत भी प्रदान करेगा।