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वोट चोरी में झारखंडी कनेक्शन का खुलासा बाकी है

यूपी के व्यक्ति ने सामने आकर अपनी भागीदारी से किया इंकार

  • आईपी एड्रेस से पता चलेगा ठिकाना

  • कर्नाटक सीआईडी को नहीं मिली सूचना

  • साफ्टवेयर के इस्तेमाल की उम्मीद सर्वाधिक

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः आम तौर पर इंटरनेट पर हर जानकारी खुली किताब की तरह ही होती है। इसलिए अगर प्रारंभिक सूचनाएं सामने आयी हैं तो क्रमवार तरीके से शेष जानकारी भी कंप्यूटर के विशेषज्ञ अपने तरीके से खोज सकते हैं। खास तौर पर बार बार जिन आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस का उल्लेख किया जा रहा है, उनका विवरण सामने आने के बाद वे भौगोलिक तौर पर कहां स्थित हैं, इसके छिपाना असंभव हो जाएगा। इसके लिए किसी विशेषज्ञता की जानकारी जरूरी नहीं। आम कंप्यूटर इस्तेमाल कर्ता भी इन्हें खोज सकता है।

राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों के संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ कॉल सेंटरों और फोन नंबरों का उल्लेख किया था। इंटरनेट पर इन आरोपों के बारे में नई जानकारी उपलब्ध है। राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर्स लिस्ट से हटा दिए गए थे, और यह काम कॉल सेंटरों और सॉफ्टवेयर के ज़रिए किया गया था। उन्होंने कुछ मोबाइल नंबर भी दिखाए, जिनके बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि इनका इस्तेमाल मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया गया था। इन आरोपों के बाद कई नई जानकारियां सामने आई हैं।

एक शख्स, अंजनी मिश्रा, ने दावा किया है कि राहुल गांधी ने उनका मोबाइल नंबर वोट चोरी में शामिल लोगों की लिस्ट में दिखाया, जबकि उन्होंने ऐसा कोई आवेदन नहीं किया था। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद उन्हें लगातार अजनबी नंबरों से कॉल आ रहे हैं, जिससे वह परेशान हो गए हैं और पुलिस की मदद लेने पर विचार कर रहे हैं।

वैसे वैकल्पिक मीडिया में अंजनी मिश्र की गतिविधियों की परख हुई है और एडवोकेट अंजनी मिश्र की पहचान एक भाजपा समर्थक के तौर पर हो चुकी है। अब जिन अन्य टेलीफोन नंबरों का उल्लेख है, उनके नंबर सामने आने पर दरअसल यह सारे नंबर किनके नाम पर है, उसकी भी पहचान हो जाएगी।

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों का खंडन किया है। आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट से ऑनलाइन नाम नहीं हटाए जा सकते हैं, और उनके आरोप आधारहीन हैं। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोदा बाई और सूर्यकांत जैसे कुछ और व्यक्तियों का उदाहरण भी दिया, जिनके नंबरों से कई वोट डिलीट कर दिए गए, और उन्हें इस बारे में पता भी नहीं था। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर कर्नाटक के नहीं थे, बल्कि अन्य राज्यों के थे। इसमें झारखंड का भी नंबर होने की चर्चा है।

अब इससे महत्वपूर्ण आईपी एड्रेस है, जिससे भौगोलिक स्थान की जानकारी मिलती है। इससे पहले भी ईमेल पर बम से उड़ाने जैसी धमकी देने वालों को इसी आईपी एड्रेस के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। वैसे यह भी स्पष्ट हो गया है कि कर्नाटक सीआईडी को अब तक इस बारे में चुनाव आयोग ने कोई जानकारी नहीं दी है।

अब किसी दूसरे माध्यम से अगर इसका खुलासा हुआ तो तय है कि चंद दिनों में कहां से और किन लोगों ने यह खेल किया है, यह स्पष्ट हो जाएगा। वैसे राहुल गांधी ने जिस कम समय में नाम डिलीट करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया है, वह व्यवहारिक तौर पर किसी इंसान द्वारा कर पाना संभव नहीं है तो यह माना जा सकता है कि इसके लिए किसी खास साफ्टवेयर का प्रयोग किया गया है। अब इसका झारखंड कनेक्शन क्या है, यह अभी पर्दे के पीछे है।