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अगले माह तक कोई बड़ी उलटफेर संभव नहीं

झारखंड भाजपा में अब वेट एंड वाच की स्थिति का असर

  • नागपुर का दौरा किया रघुवर दास ने

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष बदलने की चर्चा तेज

  • दिल्ली में फेरबदल का असर यहां भी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड भाजपा अभी फिलहाल किसी बड़े कार्यक्रम अथवा जिम्मेदारी की तरफ नहीं बढ़ने वाली है। दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का एलान होने के बाद ही आगे कोई पहल होगी। इस बीच प्रदेश स्तर के नेता अपने अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने के लिए कुछ कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं लेकिन फिलहाल बड़ा कुछ ऐसे में नहीं होने जा रहा है।

वैसे भी कई बड़े नेता आये दिन दिल्ली के चुनाव प्रचार में भागीदारी निभा रहे हैं। कई अन्य राज्यों के उपचुनावों में भी इन नेताओं की जिम्मेदारी है। लिहाजा झारखंड भाजपा में सही अर्थों में वेट एंड वाच जैसी स्थिति है। दरअसल रघुवर दास के पार्टी में दोबारा योगदान करने के वक्त समझा गया था कि तत्काल ही कोई फेरबदल होगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

लिहाजा प्रदेश स्तर के नेता भी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि आखिर रघुवर दास को प्रदेश में अथवा राष्ट्रीय समिति में कोई जिम्मेदारी मिलेगी। इस बीच श्री दास नागपुर का दौरा कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय में हाजिरी लगा चुके हैं। खबर है कि उन्होंने नितिन गडकरी के साथ भी भेंट की है। इन दोनों सूचनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। उनके समर्थक तो पहले यह कहने तक से नहीं हिचक रहे थे कि जेपी नड्डा के बाद रघुवर दास को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाने वाला है। फिलहाल इस चर्चा पर विराम लगने के बाद भी उनका नागपुर दौरा कुछ न कुछ संकेत देता है।

प्रदेश में नये राष्ट्रीय अध्यक्ष के बनने के बाद ऊपर से नीचे तक के फेरबदल की आस में भी कई लोग सभी दरवाजों पर दस्तक देने का सिलसिला जारी रखे हुए है। यह तय है कि जब नया राष्ट्रीय अध्यक्ष आयेगा तो वह अपने नई कमेटी का गठन करेगा और सभी प्रदेश समितियों पर इसका असर पड़ना तय है।

ऐसे में आनन फानन में कोई पहल किसी भी नेता के लिए सेल्फ साइड गोल करने जैसा भी साबित हो सकता है। जानकार मानते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व का सबसे अधिक ध्यान अभी दिल्ली विधानसभा चुनाव पर है, जहां उसे आम आदमी पार्टी की सरकार से जूझना पड़ रहा है। देश  की राजधानी होने औऱ पिछले दो विधानसभा चुनावों में खराब परिणाम ने भाजपा के लिए यह बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब दिल्ली का चुनाव निपट जाने के बाद ही संगठन के बाकी काम होंगे। फिलहाल प्रदेश स्तर पर भी इसी संबंध में जोड़ घटाव पर चर्चा जारी है।