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केपी शर्मा ओली सहित शीर्ष नेता सेना की शऱण में

नेपाल में सियासी उथल पुथल के बीच घर छोड़कर भागे

राष्ट्रीय खबर

काठमांडूः नेपाल में मची राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल ने देश के शीर्ष नेताओं को अपनी जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक हुए जेनरेशन Z के प्रदर्शनकारियों के बढ़ते दबाव के आगे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। न सिर्फ ओली, बल्कि उनके कई मंत्रियों को भी अपनी सुरक्षा के लिए अज्ञात स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।

पहले यह सूचना आयी थी कि ओली चुपके से चीन भाग गये हैं। दूसरी तरफ यह आंदोलन ओली के इस्तीफे के बाद भी शांत नहीं हुआ है, बल्कि और भी उग्र हो गया है। प्रदर्शनकारी अब नेपाल के शीर्ष राजनीतिक हस्तियों के घरों को निशाना बना रहे हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री और माओवादी नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड, संयुक्त समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल, पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए नेपाली सेना ने देश के प्रमुख नेताओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी नेताओं को शिवपुरी स्थित आर्मी स्टाफ कॉलेज में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली पुलिस की सुरक्षा में रखा गया है। सुरक्षा कारणों से इन सभी को सेना की बैरक में ही रहना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री और यूएमएल के अध्यक्ष ओली को काठमांडू के शिवपुरी स्थित आर्मी स्टाफ कॉलेज में रखा गया है। प्रधानमंत्री आवास में आग लगने की घटना के बाद, उन्हें हेलीकॉप्टर से वहां ले जाया गया था। फिलहाल, वे सेना की कड़ी सुरक्षा में हैं। माओवादी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड भी शिवपुरी स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में ही मौजूद हैं।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने नेपाली कांग्रेस, यूएमएल और संयुक्त समाजवादी पार्टी जैसे विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मिलकर इस संकट से निकलने का रास्ता तलाशने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष देउबा और उनकी पत्नी आरजू भी प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल हो गए थे। उन्हें उनके बुधनीलकांठा स्थित आवास से बचाकर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल, झालानाथ खनल, पूर्व मंत्री प्रकाश मान सिंह और यूएमएल उपाध्यक्ष बिष्णु पौडेल जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी सुरक्षा के लिए शिवपुरी सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में ही रखा गया है। यह स्थिति नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व मोड़ है, जहां जनता का गुस्सा इतना बढ़ गया है कि शीर्ष नेताओं को सैन्य बैरकों में शरण लेनी पड़ रही है।