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नकली आईएएस अधिकारी की गिरफ्तारी और जाँच

काफी दिनों से लोगों के अलावा सरकार को भी झांसा दे रहा था

लखनऊः लखनऊ के वजीरगंज थाना क्षेत्र में बुधवार की रात पुलिस द्वारा की गई एक सामान्य और नियमित जाँच ने एक बड़े जालसाजी के मामले का पर्दाफाश कर दिया। यह घटना तब हुई जब पुलिस अधिकारी राकेश त्रिपाठी ने एक शानदार गाड़ी को रोका।

गाड़ी के पिछले हिस्से में बैठे एक युवा व्यक्ति ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना परिचय पत्र दिखाया, जिस पर लिखा था, “निदेशक, सूचना प्रौद्योगिकी, केंद्रीय गृह मंत्रालय।” उसने बेहद प्रभावशाली अंदाज़ में पुलिस से सवाल किया कि क्या उन्हें पता है कि उन्होंने किसकी गाड़ी रोकी है, और तुरंत ही अपना कार्ड थमा दिया।

इस कार्ड पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक की लाट भी बनी हुई थी, जो सरकारी अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेजों की तरह दिखती थी।

पुलिस को युवक के हावभाव और उसकी बातों पर संदेह हुआ और उन्होंने आगे की पूछताछ शुरू की। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ी, चौंकाने वाले खुलासे सामने आने लगे। यह पता चला कि वह व्यक्ति कोई सरकारी अधिकारी नहीं, बल्कि एक शातिर जालसाज था।

पुलिस उपायुक्त (अपराध) कमलेश कुमार दीक्षित ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि सौरभ त्रिपाठी नामक इस युवक को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि सौरभ कई वर्षों से खुद को एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बताकर विभिन्न सरकारी कार्यालयों और सचिवालयों में आता-जाता रहा था।

शुरुआती जाँच से यह भी पता चला है कि सौरभ ने कुछ साल पहले बिहार सरकार के साथ काम किया था, और इसी दौरान उसने सरकारी डोमेन वाली एक ईमेल आईडी प्राप्त कर ली थी, जिसका वह अपने फर्जीवाड़े के लिए दुरुपयोग कर रहा था। पुलिस ने उसकी पहचान पुख्ता करने के लिए उसके घर पर छापा मारा, जहाँ उन्हें चौंकाने वाली चीजें मिलीं।

वहाँ से छह बेहद महंगी गाड़ियाँ बरामद हुईं, जिनमें डिफेंडर, फॉर्च्यूनर, मर्सिडीज और इनोवा जैसी लक्जरी गाड़ियाँ शामिल थीं। हालांकि, पुलिस अभी यह पता लगा रही है कि क्या वह इन सभी गाड़ियों का असली मालिक है या नहीं। इसके अलावा, उसके पास से विभिन्न सरकारी विभागों की नकली मुहरें, दस्तावेज, लेटरहेड और सचिवालय में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी पास भी बरामद किए गए हैं।

जाँच में यह भी सामने आया है कि सौरभ अपने फर्जी पद का इस्तेमाल न केवल सरकारी तंत्र में घुसने के लिए करता था, बल्कि वह कई सामाजिक और व्यावसायिक कार्यक्रमों में विशेष अतिथि के रूप में भी शामिल होता था और यहाँ तक कि पुरस्कार भी वितरित करता था, जिससे उसकी विश्वसनीयता बनी रहे।

पुलिस ने उसके निजी सचिव के रूप में काम कर रहे एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है, जिससे इस गिरोह के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर जोर दिया है कि किस तरह कुछ लोग अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लेते हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जाँच कर रही है ताकि इसके पीछे के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।