बिहार की विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण संबंधी आवेदन खारिज
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अविश्वास की स्थिति पर भी चिंता जतायी
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विधि विशेषज्ञ अलग से इसकी रिपोर्ट देंगे
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गोपनीय रिपोर्ट पर 8 को विचार किया जाएगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की समय सीमा बढ़ाने की याचिका को खारिज कर दिया। यह समय सीमा 1 सितंबर को समाप्त हो रही थी। कोर्ट ने चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास की बढ़ती खाई पर चिंता भी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची को अपडेट करने की विशेष प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट तैयार होने के बाद और नामांकन दाखिल होने तक भी दावे और आपत्तियाँ दर्ज की जा सकती हैं। बिहार में मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की अपील के लिए 1 सितंबर की समय सीमा तय की गई थी।
इस अवधि में, दो लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने का अनुरोध किया, जबकि 33,000 से अधिक लोगों ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन दिया।सुप्रीम कोर्ट ने बिहार लीगल सर्विस अथॉरिटी को निर्देश दिया है कि वह मतदाताओं और राजनीतिक दलों की मदद के लिए पैरा लीगल वॉलेंटियर तैनात करे।
ये वॉलेंटियर जिला जजों के सामने गोपनीय रिपोर्ट पेश करेंगे, जिस पर 8 सितंबर को विचार किया जाएगा। चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा कि नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाता सूची में सुधार, दावे और आपत्तियाँ दर्ज की जा सकती हैं। हालांकि, 1 सितंबर के बाद दायर किए गए आवेदनों पर वोटर लिस्ट को अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही विचार किया जाएगा।
आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ाने से मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में देरी होगी। कोर्ट ने राजनीतिक दलों से मतदाता सूची के मुद्दे पर सक्रिय होने को कहा। कोर्ट का मानना है कि यह भ्रम काफी हद तक भरोसे की कमी के कारण पैदा हुआ है।