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कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा का प्रदर्शन

पटना के सदाकत आश्रम की पुनरावृत्ति की रांची में कोशिश

  • महिला मोर्चा के लोग वहां पहुंचे थे

  • पुलिस ने पहले ही बैरिकेड्स लगाये थे

  • झंडा के साथ साथ डंडा भी लहराया गया

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सियासी घमासान: भाजपा और कांग्रेस महिला मोर्चा की कार्यकर्ता आमने-सामने, तीखी नारेबाजी के साथ हुई झड़प। रांची में सोमवार का दिन राजनीतिक टकराव के नाम रहा, जब भाजपा और कांग्रेस महिला मोर्चा की कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर आमने-सामने आ गईं। यह पूरा वाकया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माता पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ, जिसने राज्य की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट ला दी है।

सुबह से ही, रांची का कांग्रेस कार्यालय एक राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका था। भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता वोट अधिकार यात्रा के दौरान दिए गए इस बयान के विरोध में कांग्रेस भवन का घेराव करने पहुंची थीं। इस विरोध प्रदर्शन की सूचना पहले से ही प्रशासन के पास थी, जिसके चलते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कांग्रेस दफ्तर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था और दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाई गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

जैसे-जैसे दिन चढ़ा, भाजपा महिला मोर्चा की कई कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कांग्रेस दफ्तर की ओर बढ़ने लगीं। उनका मकसद कांग्रेस नेताओं से इस टिप्पणी पर माफी की मांग करना था। बैरिकेडिंग के पास पहुंचते ही उन्हें रोक दिया गया। ठीक उसी समय, दूसरी ओर से कांग्रेस महिला मोर्चा की कार्यकर्ता भी अपनी पार्टी का बचाव करने के लिए सामने आ गईं।

इसके बाद जो हुआ, वह केवल नारेबाजी का एक सिलसिला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक युद्ध था। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नारेबाज़ी शुरू हो गई। एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ता वोट चोर, गद्दी छोड़ो के नारे लगा रहे थे, तो दूसरी ओर भाजपा महिला मोर्चा राहुल गांधी चोर है जैसे नारे लगाकर जवाब दे रही थी। हवा में तनाव साफ महसूस किया जा रहा था, और सड़क राजनीतिक नारों से गूंज रही थी।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश की। उनका इरादा कांग्रेस कार्यालय के अंदर घुसकर विरोध दर्ज कराना था। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे हल्की धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई। हालांकि, पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कार्यकर्ताओं को नियंत्रित कर लिया। उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को बिगड़ने से बचाया।

इस घटना के बाद, प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुला लिया, ताकि किसी भी तरह के तनाव को बढ़ने से रोका जा सके। पूरे इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई। यह घटना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता व्यक्तिगत हमलों के स्तर तक पहुंच गई है। यह झड़प एक बार फिर साबित करती है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहेगा। कुल मिलाकर, इस घटना ने न केवल रांची बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।