समापन के करीब पहुंचती इंडिया गठबंधन की यात्रा
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पटना में होगी अंतिम शक्ति परीक्षण
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सारण से साथ निकले तीनों प्रमुख नेता
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आज की यात्रा में पहले से अधिक भीड़
राष्ट्रीय खबर
पटनाः बिहार में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा को विपक्षी एकता का एक नया रूप देखने को मिला। यात्रा के 14वें दिन, सारण जिले के एकमा में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बिहार के नेता तेजस्वी यादव भी उनके साथ शामिल हुए। राहुल सांकृत्यायन की ऐतिहासिक कर्मभूमि पर इन तीनों नेताओं का एक साझा रोड शो हुआ, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम विपक्षी गठबंधन की भविष्य की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सारण के एकमा में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव एक खुले जीप में सवार होकर जनता के बीच आए। एकमा, जिसे महान लेखक और विचारक राहुल सांकृत्यायन की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है, उस धरती पर इन नेताओं का एक साथ आना अपने आप में एक बड़ा संदेश दे रहा था।
इस दौरान, तीनों नेताओं ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया। भीड़ में शामिल युवाओं और महिलाओं का उत्साह देखने लायक था। इस रोड शो के दौरान, राहुल गांधी सफेद टी-शर्ट और गले में गमछा डाले हुए थे, जबकि अखिलेश यादव पारंपरिक कुर्ते-पाजामे में दिखे। जगह-जगह लोगों ने फूलों की मालाओं से उनका स्वागत किया, जो इस बात का संकेत था कि जनता में इन नेताओं के प्रति कितना जोश है।
राहुल गांधी के नेतृत्व में निकली वोटर अधिकार यात्रा अब अपने अंतिम चरण में है। इस यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल जनसभा के साथ होगा। इस रैली को विपक्षी दलों के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। जनसभा में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशेष रूप से शामिल होंगे।
इसके अलावा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, डीएमके नेता एम.के. स्टालिन, और कनिमोझी समेत कई दिग्गज विपक्षी नेता मौजूद रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत सोरेन की मौजूदगी से बिहार में विपक्षी एकता और भी मजबूत होगी। इस रैली में झारखंड सरकार के कई मंत्री और महागठबंधन के हजारों कार्यकर्ता भी हिस्सा लेंगे, जिससे यह रैली एक ऐतिहासिक राजनीतिक घटना बन सकती है।
भाजपा के काला झंडा के बदले टॉफी दी
आरा में रोड शो के दौरान, राहुल गांधी को भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। ये कार्यकर्ता काले झंडे दिखा रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। जब राहुल का काफिला उनके सामने से गुजरा, तो उन्होंने विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को अपने पास बुलाया। सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों के हाथ से झंडे लेने की कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी ने एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने अपनी जेब से टॉफी निकाली और विरोध कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं को थमा दी।
राहुल गांधी का यह तरीका चर्चा का विषय बन गया। इस घटना के बाद उनका काफिला वीर कुंवर सिंह मैदान की ओर बढ़ गया, जहाँ उन्होंने और महागठबंधन के अन्य नेताओं ने एक जनसभा को संबोधित किया। यह वोटर अधिकार यात्रा न सिर्फ कांग्रेस के लिए, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
यह यात्रा न केवल जनता से जुड़ने का एक माध्यम बनी है, बल्कि इसने विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता को भी मजबूत किया है। पटना में होने वाली जनसभा विपक्षी एकता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है, जो 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है।