भाई साहब नरेंद्र मोदी ने तो पहले ही साफ साफ कहा था, फकीर आदमी हूं झोला उठाकर चल दूंगा। इसलिए ज्यादा टेंशन लेने की बात नहीं है। लेकिन ट्रंप ने जो धोखा दिया है, उसका मुंहतोड़ उत्तर तो देना ही पड़ेगा। जापान होते हुए चीन जाना है। दौरे में तीन अलग अलग राष्ट्राध्यक्षों से मिल लेना है।
जाहिर है कि अपने ट्रंप भइया की नजर भी इस मुलाकात पर बनी रहेगी क्योंकि इतने सारे विरोधी अगर एकजुट हो रहे हैं तो कुछ न कुछ गुल खिला देंगे और जो कुछ श्रेष्ठ अमेरिका के नाम पर किया है, वह धरा का धऱा रह जाएगा। ट्रंप की चिंता भी वाजिब है क्योंकि आम अमेरिकी सिर्फ अपना भला देखता है और इसमें आंच आ गयी तो वह पलटने में वक्त भी नहीं लेगा।
भारत में अमेरिकी टैरिफ का सबसे बुरा यह हो रहा है कि इसका सबसे ज्यादा अगर गुजरात पर पड़ रहा है। वहां का हीरा और टेक्सटाइल उद्योग धीरे धीरे बंदी की कगार पर बढ़ रहे हैं। कारखाने बंद हो रहे हैं और कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। गुजरात में अगर ऐसा कुछ होता है तो नरेंद्र मोदी का चिंतित होना स्वाभाविक है।
सूरत का हीरा उद्योग प्रभावित हो चुका है, जहां के आलीशन हीरा व्यापार केंद्र का उदघाटन खुद नरेंद्र मोदी ने ही किया था। खैर मोदी जी उद्यमी व्यक्ति है, जापान और चीन का दौरा कर कुछ न कुछ तो हासिल कर लेंगे, इसकी पूरा उम्मीद है। अगर चीन के साथ सीमा विवाद पर कुछ बात आगे बढ़े तो यह भी अच्छी बात होगी।
लेकिन हमें 1962 से पहले के हिंदी चीनी भाई भाई का धोखा नहीं भूलना चाहिए। अगर मोदी जी की याददाश्त कम है तो ट्रंप के समर्थन में अमेरिका में किया प्रचार तो कमसे कम याद रखना चाहिए। कोई लिहाज तक नहीं रखा और लगातार कहते चले गये कि युद्धविराम मैंने कराया क्योंकि मैंने दोनों देशों को टैरिफ की धमकी दी थी वरना दोनों तो परमाणु युद्ध तक आगे बढ़ने को तैयार हो गये थे।
इसी बात पर पुरानी ब्लैक एंड ह्वाइट फिल्म रेलवे प्लेटफॉर्म का यह गीत याद आ रहा है, जिसे लिखा था साहिर लुधियानवी ने और संगीत में ढाला था मदन मोहन ने। इसे मोहम्मद रफी ने अपना स्वर दिया था। गीत को बोल कुछ इस तरह हैं।
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत गाता जाए बंजारा
लेके दिल का इकतारा
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
पल दो पल का साथ हमारा पल दो पल की यारी
आज नहीं तो कल करनी है चलने की तैयारी
आज नहीं तो कल करनी है चलने की तैयारी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
क़दम-क़दम पर होनी बैठी अपना जाल बिछाए
इस जीवन की राह में जाने कौन कहाँ रह जाए
इस जीवन की राह में जाने कौन कहाँ रह जाए
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
धन-दौलत के पीछे क्यों है ये दुनिया दीवानी
यहाँ की दौलत यहाँ रहेगी साथ नहीं ये जानी
यहाँ की दौलत यहाँ रहेगी साथ नहीं ये जानी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
सोने-चाँदी में तुलता हो जहाँ दिलों का प्यार
आँसू भी बेकार वहाँ पर आहें भी बेकार
आँसू भी बेकार वहाँ पर आहें भी बेकार
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
दुनिया के बाज़ार में आख़िर चाहत भी व्यापार बनी
तेरे दिल से उनके दिल तक चाँदी की दीवार बनी
तेरे दिल से उनके दिल तक चाँदी की दीवार बनी
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
हम जैसों के भाग में लिखा चाहत का वरदान नहीं
जिसने हमको जनम दिया वो पत्थर है भगवान नहीं
जिसने हमको जनम दिया वो पत्थर है भगवान नहीं
बस्ती-बस्ती पर्वत-पर्वत …
अब वहां से चलें तो पड़ोसी राज्य बिहार को भी देख लेते हैं। राहुल गांधी का वोटर अधिकार यात्रा से भाजपा अब पूरी तरह टेंशन में है, इसे लेकर संदेह की कोई गुंजाइश नहीं रही। सदाकत आश्रम में लाठियां चलीं पर यह सवाल क्यों गायब हो गया कि आखिर भाजपा वाले वहां प्रदर्शन करने क्यों गये थे। ऐसा ही प्रदर्शन रांची में भी भाजपा की महिला शाखा ने किया था। गनीमत रही कि रांची में कांग्रेस कार्यालय में उनका चाय के साथ स्वागत किया गया।
इनदिनों सूत्रों के हवाले से खबर चलाने की बीमारी फैल रही है। जब वोट चोरी का हंगामा हुआ तो किसी नेता ने कह दिया पूर्व चुनाव आयुक्त विदेश भाग गये हैं। तब सूत्रों के हवाले से खबर आयी कि वह देश में ही हैं। उपराष्ट्रपति धनखड़ के मामले में भी सूत्रों के हवाले से खबर आयी। अब चुनाव आयोग भी सूत्रों के हवाले से खबर दे रहा है। लेकिन राजीव कुमार खुद सामने क्यों नहीं आये, जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा क्यों दिया और चुनाव आयोग वोट चोरी पर क्या कहना चाहता है, यह सामने आकर कौन बतायेगा। फकीर झोला उठाकर चल देगा तो यह सारे लोग कहां भागकर जाएंगे।