इस्लामाबाद में पाकिस्तान के जरिए हो रही बात चीत
एजेंसियां
इस्लामाबाद/वाशिंगटन: दक्षिण एशिया में जारी कूटनीतिक हलचलों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि ईरान के विदेश मंत्री अपनी इस्लामाबाद यात्रा समाप्त कर रवाना हो गए हैं, लेकिन इस दौरान उनकी अमेरिकी दूतों के साथ कोई औपचारिक भेंट नहीं हो सकी। यह स्थिति तब और भी चर्चा का विषय बन गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी विशिष्ट शैली में खुलासा किया।
शनिवार की सुबह ट्रंप ने अचानक घोषणा की थी कि वे अपने दो प्रमुख दूतों—स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर—की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर रहे हैं। ये दोनों प्रतिनिधि वहां महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता के लिए पहुंचने वाले थे। राष्ट्रपति ट्रंप का दावा है कि इस रद्दीकरण की घोषणा के महज दस मिनट के भीतर ही ईरान की ओर से एक नया शांति प्रस्ताव प्राप्त हुआ। ट्रंप के अनुसार, यह नया प्रस्ताव पिछले उन सभी मसौदों की तुलना में काफी बेहतर और अधिक प्रभावी था, जिन पर अब तक बातचीत अटकी हुई थी।
जब पत्रकारों ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति से पूछा कि शुक्रवार से शनिवार के बीच अचानक ऐसा क्या बदल गया कि ईरान ने अपना रुख लचीला कर लिया, तो ट्रंप ने दो-टूक जवाब दिया, कुछ भी नहीं। उन्होंने विस्तार से समझाते हुए कहा कि पिछला दस्तावेज उम्मीदों के अनुरूप नहीं था। ट्रंप ने कहा, दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही मैंने यात्रा रद्द की, उसके दस मिनट के भीतर हमें एक नया पेपर मिला जो पहले की तुलना में कहीं अधिक ठोस था। विश्लेषक इसे ट्रंप की प्रेशर टैक्टिक्स या दबाव की राजनीति की जीत के रूप में देख रहे हैं, जहाँ किसी वार्ता को रद्द करने की धमकी मात्र से प्रतिद्वंद्वी पक्ष झुकने को मजबूर हुआ।
हालांकि, इस नए प्रस्ताव के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के प्रति अपनी रेड लाइन (लक्ष्मण रेखा) को फिर से दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अमेरिकी प्रशासन अपनी इस मांग पर अडिग है कि ईरानी शासन को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने संकेत दिया कि भविष्य की कोई भी बातचीत इसी शर्त के इर्द-गिर्द घूमेगी।
फिलहाल, इस्लामाबाद से ईरानी विदेश मंत्री की बिना मुलाकात रवानगी और वाशिंगटन से ट्रंप के इन दावों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अनिश्चितता पैदा कर दी है। यद्यपि ईरान की ओर से आए इस नए प्रस्ताव ने बातचीत की मेज पर लौटने की हल्की उम्मीद जगाई है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष वास्तव में एक स्थायी समझौते के करीब पहुंच पाएंगे या यह केवल समय बिताने की एक और कोशिश है।