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एक निठल्ले की हवाई यात्रा, यात्रा है या काबुल का मोर्चा?

प्रकाश सहाय

यूं तो निठल्ले जी का जीवन हवा हवाई में ही बीता ..दशकों मुंगेरी लाल के हसीन सपनों के साथ निठल्ले जी आसमान में घुघुआ माना खेलते रहे.. अचानक एक दिन प्रबल इच्छा जागृत कि हकीकत में  आसमान की सैर की जाय …

आनन फानन में हवाई जहाज का टिकट कटाया ..बंगलौर से दिल्ली का …

निठल्ले जी यानि आपका यह नाचीज़ ख़ाकसार ( मै खुद ) अपने पुस्तैनी खाकी कपड़े के लिहाफ से मढ़े  सूटकेस लेकर एयरपोर्ट जा धमका ..थोड़ा घबराया थोड़ा इतराया सा… पहिला चांस था हवा में गुलाटी खाने का ..

एयरपोर्ट के प्रवेश द्वार पर टिकट दिखाया…

सुरक्षाकर्मी ने कहा :

” आधार कार्ड प्लीज ”

हमने अपना आधार कार्ड थमा दिया…

सुरक्षाकर्मी कभी टिकट को देखे ..तो कभी  आधार कार्ड पर चिपके फोटो को ..तो कभी मेरे मासूम थोबड़े को …यह तिकड़ी का सिलसिला पूरे तीन मिनट चला …

आखिरकार संदिग्ध निगाह से देखते हुए उसने इशारा किया आगे बढ़ने का ..मानो बड़ा अहसान किया …

गहरी सांस लेकर मैने सुरक्षाकर्मी की पारखी निगाह को सलाम किया …क्योंकि दशकों के बाद भी मैं आधार कार्ड के फोटो से अपने चेहरे का मिलान करने में असफल रहा था ..

खैर आगे बढ़ा …सुरक्षा जांच का चक्रव्यूह बांहे पसारे खड़ा था ..

वहां पर तो दिमाग का दही जम गया  ..

मशीन से पूरे बदन की जांच हुई..माथे  से लेकर एड़ी तक ..हाथ उठा कर ..पीछे घूमा कर ..एकदम चोर चाईं उच्चका टाइप फीलिंग उभरा अपने प्रति …

हद तो तब हुआ पैंट का बेल्ट भी उतरवा दिया था पहले ही .. पैंट ढीला था ..अब पीटी करने का पोज देना था दोनों हाथ ऊपर उठा कर ..फैला कर …ऐसा करते ही

पैंट नीचे सरकने लगता ..एक हाथ ऊपर तो दूसरा हाथ पैंट पर…

बस निठल्ले की बॉडी को एमआरआई मशीन में डालने की कसर रह गई …

खैर जांच से निवृत होकर अपना पुस्तैनी सूटकेस लेने पहुंचा तो जिसे सुरक्षा कर्मी ने अलग

अगोर के रहा था …मेरा एंटीक टाइप सूटकेस उसे अजूबा लग रहा था …

उसने बोला :

सूटकेस की जांच होगी …खोलिए .”..

सूटकेस की जांच हुई ..

हिरन छाप ईसफगोल की भूंसी  का डब्बा देख कर मेरे फूले हुए पेट की ओर   देख कर अर्थपूर्ण अंदाज में मुस्कुराया ..फिर टूथ ब्रश के साथ धागे से बंधी तांबे की जीभी को यूं उलट पलट कर देखने लगा मानो यह राणा सांगा की तलवार हो ..

हद तो तब हो गई जब उसने मेरे  ” लोटा छाप दंत मंजन ”  को चखने के लिए बोला …यह पूछते हुए कि इंडिया में ई कहां मिलता है ?….मन किया कि पूरा एड्रेस बता दें .. कि ” आरा के कायम नगर पुल के नीचे बिरंची बाबा के पान दुकान में मिलता है “..

खैर सुरक्षा जांच से निवृत होकर आगे बढ़े हम..

हवाई जहाज उड़ने में अभी दो घंटे बाकी थे ..भूख लगी थी लेकिन शरीफ सच्चे भारतीय के लिए एयरपोर्ट में खाने के लिए कुछो नै था..जो कुछ था सब विदेशी आइटम मॉडर्न इंडियंस के लिए …

चिक, फिल, ए, सबवे, केएफसी आदि ..चिक फिल ए के सामने के मेनू के पहले नम्बर पर गर्म कुकुर  ( हॉट डॉग )  देख कर मन उल्टियाइन लगने लगा .. धरम भरस्ट  होते होते बचा …

कान से धुंआ निकल गया जब दारू के दुकान का नाम लिकर लाइब्रेरी देखा…हमरा अकिल का अलमारी चरमरा गया भाई ..

एयरपोर्ट के भीतर एकदम खालिस इंपोर्टेड माहौल था ..बोर्डिंग गेट पर पहुंचा और कोने में बैठ गया …आस पास सैकड़ों लोग थे लेकिन सन्नाटा था …सब अपने अपने मोबाइल लैपटॉप पर व्यस्त थे मस्त थे ..बचपन में सुना किस्सा याद आ गया कि राक्षस की जान तोते में होती थी …सबका मोबाइल तोता टाइप दिख रहा था हमको ..

बोर्डिंग की घोषणा होते ही सुरंगनुमा रास्ते से विमान की ओर चल दिए …बीच में फिर रुकने का इशारा..फिर खानदानी सूटकेस की जांच …अबकी तो खुद हमको दाऊद का आदमी होने का पुख्ता फीलिंग होने लगा ..

ई सिक्योरिटी वाला सब सभे यात्री को हाइजैकर्स ही बुझता है का !

हवाई जहाज के द्वार पर फिर एक बार बोर्डिंग पास की जांच हुई .. बुझाइए नै रहा था भाई कि हवाई यात्रा है या जांच यात्रा… जिंदा में ही फुल पोस्टमार्टम हो रहा था ..

गेट पर लाल परी लेखा एयर होस्टेस खड़ी थी यात्रियों के स्वागत के लिए ….लेकिन उनका मशीनी अंदाज देख कर

” अतिथि देवो भवः ” का भाव चीथड़ा चीथड़ा हो गया …लाल परी हाथ जोड़ कर खड़ी थी लेकिन देख रही थी अपना पीछे पायलट जी को ..जब हम अपना निठल्लापनी का प्रदर्शन किए और अपना पुस्तैनी सूटकेस को नीचे रख कर जोर से बोले :

” परनाम ”

तो वो झेंप गई ..

खैर जब ओखली में मुंडी डाल ही दिए थे तो मूसल से काहे डरना ..

अपने सीट पर बैठते ही खपक से गए ..

हवाई जहाज वालों का पहला अघोषित संदेश फील हो गया कि

हवाई यात्रा करना हो तो स्लिम ट्रिम  रहिए ..नहीं तो ” तशरीफ ” हवा में ही लटका रहेगा

मने खाया पीया तंदुरुस्त यात्री के लिए तो ई लोग बहुते बेरहम है ..

कुछो हो आसमान का बात ही कुछ और है ..

तबे तो फरिश्ता भी आसमान से ही आता है..प्यार सीखने …

भगवान भी आकाश पर बैठ कर तकदीर लिखते हैं ..

तितली भी फूल को ठेंगा दिखा कर आकाश को जाती है …

अब निठल्ले जी की हवा में विचरने की ख्वाइश की अंतिम घड़ी आ पहुंची …विमान का इंजन स्टार्ट होते ही ..सब की सब लाल परियां फिर से हलकान करने लगीं ..

सीट की पेटी से खुद को बांध लीजिए ..मैने नहीं बांधा तो उसने बांध दिया …प्रभु की असीम कृपा रही कि हाथ गोड़ नै बांधा..

सीट सीधी कीजिए ..

इसके बाद जो कहा गया उसको सुन कर मन एकदम हदस गया ..

एयरलाइंस वालों का आत्म विश्वास शुरू से ही झलक रहा था ..

एयरपोर्ट के मुख्यद्वार से लेकर विमान के द्वार तक उन्हें पूरा विश्वास था कि प्लेन हाइजैक हो सकता है …

अब विमान के अंदर यह विश्वास उछल कर एक कदम और आगे बढ़ गया कि प्लेन दुर्घटना ग्रस्त होने की प्रबल  संभावना है …

एयर होस्टेस ने बताया कि अचानक हवा का दबाव कम होने पर मास्क से सांस कैसे लेना है ..यह सुनते ही मेरी सांस फूलने लगी …

प्रदर्शन के दौरान उनकी जुल्फें खराब ना हो जाएं इसलिए उन्होंने मास्क की पट्टी को सर के पीछे बांधने का उपक्रम नहीं किया …

अभी डरना डराना बाकी था ..

विमान अगर आपात स्थिति में पानी में उतरता है तो सीट के नीचे रखे लाइफ जैकेट को कैसे पहनना है …कैसे फुलाना है…कैसे सीटी बजाना है ..

यह सुन का मेरी सिट्टी पिट्टी गुम थी ..

हवाई जहाज का दुर्घटना ग्रस्त होने का विश्वास एयर होस्टेस में कूट कूट कर भरा दिख रहा था …

धर्मपत्नी के रामायण का एगो मंतर हमको रटा दिया था :

” चलत विमान कोलाहल होई

जय रघुवीर बोले सब कोई ”

दुर्घटना से बचने का शर्तिया रामबाण उपाय ..

 

एक बार लगा कि भारी मिस्टेक होगा है इस निठल्ले से ..

ससुरा ई हवाई यात्रा है कि काबुल का मोर्चा !

जो भी हो ..जैसा भी हो ..लेकिन आसमान की ताबीर और तासीर का कोई जवाब नहीं …एकदम लाजवाब है चौदहवीं की चांद की तरह …

अब देखिए जमीन पर साफ सफाई.. चौका बर्तन पोछा और जूठन साफ करने वाली को दाई करते हैं ..नौकरानी कहते है ..बहुत इज्जत दी गई तो काम वाली बाई कहते हैं .. थैंक्यू so nice of you..great .. Lovely आदि विशेषण इस्तेमाल करने की बात तो कोसो दूर .. सीधे मुंह बात नहीं करते …( जब की कोई मेहनत का काम खराब नहीं होता )

लेकिन यही विशेषण एयर होस्टेस के लिए दांत चियार कर बार बार कहते हैं …

हवाई दाई कहने या सोचने की बात सपने में नहीं आती ..

यात्री अपना जूठा पैकेट..बोतल कप लेकर एयर होस्टेस का इंतजार ऐसे करते हैं जैसे मिथिला में बारात का भी नहीं करते लोग…

एयर होस्टेस का.. ज्योंहि वे प्लास्टिक का बोरा लेकर आती है ..यात्रीगण अपना जूठन उसमें डाल कर तन मन आत्मा से तृप्त हो जाते हैं ..बार बार थैंक्स कहते थकते नहीं ..

सब आसमान का करिश्मा है हुजूर…

ज्ञान की गगरी से भरे इस निठल्ले को एक बात समझ में नहीं आई ..विमान में घुसते ही सभी यात्री मौनी बाबा क्यों बन जाते हैं ?… लापुआ अकलोल बकलोल चिरकुट भी एकदम से सोफिस्टिकेटेड बनने का स्वांग करते है ..मुंह फूला कर थोथ  लटका कर प्योर इंटेलेक्चुअल लुक देते हैं

एकदम ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी वाला ठस्सा ढूक जाता है ..

बेचारी एयर होस्टेस को देख कर माननीय स्पीकर की याद आती है ..सैकड़ों बार प्लीज प्लीज रटती रहती है थकती नहीं ..और यात्री सुनते नहीं ..

“..सीट की पेटी बांध लें..अपनी जगह से ना उठे ..अपनी कुर्सी सीधी कर लें ..खिड़की का फ्लैप खोल दें ..लेकिन काहे का प्लीज और ..पी का भी लिहाज नहीं करते ..

इस निठल्ले ने यात्रा के दौरान एक दिलचस्प बात नोट की …विमान उड़ते ही यात्रियों की लाइन लग जाती है टॉयलेट जाने के लिए …बुझाइबे नै करता है कि सब चीनी का बीमारी का मरीज है या प्रोस्ट्रेट बढ़ल है …या फिर कब्ज से हलकान हैं

या फिर आसमान में मल मूत्र विसर्जन का मजा ही कुछ और है …

या फिर आकाश में चहलकदमी कर खुद को राकेश शर्मा 2 का खिताब देना चाहते हैं ..

कुछ यात्रियों के ससुराल प्रेम से मै अभिभूत हो गया ..जैसे ही विमान के कप्तान ने बताया कि अभी हम कानपुर के ऊपर से उड़  रहे है ..मेरे बगल के यात्री मूत्र विसर्जन करने चले गए …उनका ससुराल कानपुर था

मै हैरान अवाक था …लगा कि कुछ खास बात है शौचालय में …सो देखने हम भी चल दिए ..जगह इतनी सी कि चुकू मुकु भी बैठना मुश्किल ..और मल त्यागा तो फंसे ..क्योंकि पानी नहीं कागज़ इस्तेमाल करना पड़ेगा …

छह यात्री सीट हटा कर बड़ा टॉयलेट बन सकता है लेकिन एयरलाइंस वाले इतना भी घाटा सहने को तैयार नहीं ..भले भारतीय संस्कृति संस्कार टॉयलेट में बह जाय …

इस निठल्ले की हवाई यात्रा के शोध में एक बात और साफ उभर कर आई कि

” हम सब फिरंगी हैं ”

सब हिंदी बोलने में शर्माते हैं …सबको वाटर चाहिए ..पानी या जल नहीं ..

” हम सब फिरंगी है ”

विक्रम बेताल की कहानी याद आ गई ..जैसे विक्रम की पीठ पर बेताल सवार रहता था…वैसे ही एयरपोर्ट में घुसते ही भारतीयों की पीठ पर शेक्सपीयर और मैकाले का प्रेत भीतरे तक ढूक गया है ..चाहे आंधी आए या तूफान ..धरती ही क्यों न फट जाए ..खुद क्यों न मिट जाए ..फट जाए ..लुट जाएं लेकिन क्वीन विक्टोरिया की कि हिंदी नै बोलेंगे भाई …

जमीने पर ही अंग्रेजी बोल कर भाई लोग को आसमान में उड़ने का फीलिंग आता है तब.आसमान में अंग्रेजी.का मजा ही कुछ और है …

अंग्रेजी का विरोध करने पर प्लेन में इस निठल्ले को दु बार ” यू सटअप ” से सुशोभित किया गया ..

हुआ यूं कि हमरे बगल के सीट पर एक मैम अपने एक साल के बुतरु को लेकर बैठी थी  ..अचानक बुतरु जोर से चिचियाने लगा ..

मम पियेंगे। मम ..

मैडम मॉम बोली ..ओके सन जस्ट वेट फिर एयर होस्टेस से बोली

सम वॉटर प्लीज..

वॉटर मिलते ही अपने बुतरु से बोली ..

कम ऑन सन हैव सम वाटर बचवा चीखे जा रहा था ..वाटर नै मम पियेंगे ..पांच मिनट तक यही चीखने मनाने का पिरोगराम चलता रहा …तब इस निठल्ले ने सिर्फ इतना बोला कि मैडम जी ..जब मम  मांग रहा है तो वाटर देने में काहे तुली हैं आप …तब मैडम जी आंख तरेरते हुए ..दांत पीसते हुए कहा

” यू शटअप ” ..

आपके इस नाचीज़ का मुंह लटक गया ..फिर भी फुल कंट्रोल में रहा …क्योंकि मेरे काबिल फाजिल वकील दोस्तों ने आगाह  किया है कि किसी महिला से कभी पंगा मत लेना नै तो तिलहंडे में चले जाओगे …

यही जब मैने एयर होस्टेस से कहा कि थोड़ा जल चाहिए ..तो आप पास के लोग व्यंग्य से मुस्काए… एयर होस्टेस भी बोली व्हाट ?

तब मैने अपने विज्ञान कला कौशल का परिचय देते हुए कहा .”.एगो गिलास में एच 2 ओ चाहिए “..

दूसरी बार विमान में उस वक्त शटअप का

” सम्मान ” मिला जब एयर होस्टेस 11 नंबर सीट के यात्रियों को आपातकाल द्वार खोलने की विधि बता चुकी थी ..

तब मैने बस इतना भर कहा था कि :

” देवी जी ..आप एक सबसे महत्वपूर्ण निर्देश देना भूल गई कि द्वार खोलने का रिहर्सल नै करना है ..”

तब अपनी मुखमुद्रा से देवी जी ने ” शटअप ” कहा…खामोश शब्दों को समझने में तो इस निठल्ले ने पीएचडी की हुई है …

प्लेनवा जब भी एने ओने डोले..झटका खाए तो एकदमे से अहमदाबाद याद आ जाए ..धर्मपत्नी का दिया मंतर बुदबुदाएं..

फिर मां के अखंड ज्युतिया..और पत्नी का निर्जला तीज उपवास की याद आए तो मन की घबराहट कम हो ..

खैर जैसे तैसे सफर कटा.. प्लेनवा अभी पूरी तरह रुका नहीं था कि यात्री धड़धड़ाते हुए खड़े हो गए ..खटाखट समान निकाले लगे ..

जईसे कुकुर को देख कर बिलाई भागती है वईसने

सब भागने को एकदम बेचैन दिखने लगे …एक बार फिर एयर होस्टेस माननीय स्पीकर महोदय की तरह प्लीज प्लीज रटती रही कि अपने सीट पर बैठे रहें …लेकिन काहे कोई कुछ सुने ..

प्लीज के पी का भी धज्जी उड़ा दिया हवाई यात्रियों ने …

प्लेन से बाहर निकलते ही गांव की पुरानी कहावत याद आई जिसमें मैने एक और पंक्ति जोड़ दी …

गाय कौन जे खाय ना ?

बाभन कौन जे नहाय ना ?

भौजाई कौन जे गरियाए ना ?

नेता कौन जे चुराए ना ?

प्रेमी कौन जे कुटाये ना ? और

हवाई यात्री कौन जे छटपटाए ना ?