एक झरने की मरम्मत के दौरान मिले अवशेष
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः जम्मू और कश्मीर के अनंतनाग जिले में एक ऐतिहासिक खोज हुई है, जहां एक प्राचीन झरने के नवीकरण के दौरान हिंदू देवी-देवताओं की कई मूर्तियां मिली हैं। इस घटना ने विशेष रूप से कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच गहरी रुचि और उत्साह जगाया है, जो इस साइट को कश्मीर पर 625 से 855 ईस्वी तक शासन करने वाले शक्तिशाली कार्कोटा राजवंश से जोड़ते हैं।
लोक निर्माण विभाग अनंतनाग जिले में इस वसंत (झरने) के पुनरुद्धार और बहाली के काम में लगा हुआ था। शनिवार को अधिकारियों ने बताया कि खुदाई के काम के दौरान मजदूरों को ये प्राचीन मूर्तियां बरामद हुईं। यह खोज उस क्षेत्र के समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अतीत पर प्रकाश डालती है, जो सदियों से धार्मिक महत्व का केंद्र रहा है।
जम्मू और कश्मीर विभाग के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालयों के अधिकारियों ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि बरामद की गई मूर्तियों को सावधानीपूर्वक श्रीनगर भेजा जाएगा, जहां उनकी उम्र और सटीक उत्पत्ति का निर्धारण करने के लिए सामग्री और डेटिंग परीक्षण किए जाएंगे। इन परीक्षणों से मूर्तियों के निर्माण काल और उनके ऐतिहासिक संदर्भ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
एक कश्मीरी पंडित के अनुसार, इस क्षेत्र में कार्कोटा राजवंश का गहरा प्रभाव रहा है। इसलिए, यह पूरी संभावना है कि यहां कोई प्राचीन मंदिर रहा होगा, या किसी ने इन मूर्तियों को संरक्षण के उद्देश्य से यहां छिपाया होगा। यह कथन इस संभावना को बल देता है कि यह स्थान कभी एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल रहा होगा, जहां उस राजवंश के दौरान भव्य मंदिरों का निर्माण किया गया होगा।
बताया गया है कि यह साइट, जो जिला मुख्यालय से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित है, लंबे समय से एक तीर्थयात्रा केंद्र रही है। स्थानीय लोगों और कश्मीरी पंडितों का मानना है कि इस खोज से क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
बरामद की गई मूर्तियों में कई शिवलिंग, एक उत्कृष्ट मूर्तिकला और अन्य धार्मिक वस्तुएं शामिल हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, ये पवित्र तालाब से बरामद किए गए थे। हम चाहते हैं कि इन्हें संरक्षित किया जाए। उन्होंने आगे कहा, हमने सुना है कि यहां कभी एक मंदिर हुआ करता था, इसलिए हम चाहते हैं कि यहां एक नया मंदिर बनाया जाए और इन शिवलिंगों को वहीं स्थापित किया जाए। यह भावना न केवल स्थानीय समुदाय की आस्था को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने की उनकी इच्छा को भी रेखांकित करती है।
इस खोज से न केवल पुरातत्वविदों में, बल्कि इतिहास प्रेमियों और स्थानीय समुदाय में भी गहरी रुचि पैदा हुई है। यह घटना कश्मीर के अनछुए इतिहास और उसकी प्राचीन धार्मिक विरासत के बारे में और अधिक जानने का अवसर प्रदान करती है। आगे के परीक्षणों और शोध से इन मूर्तियों के महत्व और उस स्थान के ऐतिहासिक संदर्भ पर अधिक प्रकाश पड़ने की उम्मीद है।