जेल में बंद युवक को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
-
उत्तराखंड पुलिस ने गिरफ्तार किया था
-
हाईकोर्ट ने जमानत खारिज कर दी थी
-
शीर्ष अदालत में पुलिस की दलीलें नामंजूर
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अलग-अलग धर्मों के दो वयस्क जोड़ों के फैसले पर राज्य आपत्ति नहीं कर सकता! सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले में यह बात कही है। उत्तराखंड पुलिस ने एक युवक को हिंदू युवती से शादी करने के बाद अवैध धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसे जेल भेज दिया गया।
युवक को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों जोड़े वयस्क हैं। वे एक-दूसरे के धर्मों से वाकिफ थे और शादी दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में राज्य कोई आपत्ति नहीं उठा सकता। उत्तराखंड के युवक को उसकी शादी के कुछ दिनों के भीतर ही राज्य के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2018 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था।
उस पर लोगों का अवैध रूप से धर्मांतरण करने का आरोप था। वह करीब छह महीने जेल में रहा। गिरफ्तार युवक ने जमानत के लिए पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन वहां उसकी जमानत अर्जी खारिज हो गई। बाद में उसने जेल से रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने मामले में गिरफ्तार युवक को जमानत दे दी।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि युवती और गिरफ्तार युवक दोनों ही बालिग हैं। उन्होंने अपने माता-पिता और परिवार की सहमति से शादी की है। ऐसे में राज्य उनके साथ रहने पर आपत्ति नहीं कर सकता। मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए कोर्ट ने महसूस किया कि आरोपी को जमानत मिलनी चाहिए।
शादी के कुछ दिन बाद युवती के कुछ दूर के रिश्तेदारों और कुछ खास संगठनों ने युवक के खिलाफ उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई। उस शिकायत के आधार पर युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ अवैध धर्मांतरण की धारा के अलावा धोखाधड़ी और छद्मवेश धारण कर ठगी की धाराएं भी जोड़ी गईं। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड पुलिस के मामले में आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया।