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नाबालिग लड़की को संन्यासी बनाने पर कार्रवाई

श्रीपंचदशनाम अखाड़ा ने अपने महंत को दस साल के लिए निकाला

  • अखाड़े की ऐसी परंपरा नहीं रही है

  • लड़की के घरवालों की स्वीकृति थी

  • आगरा की निवासी है यह लड़की

महाकुंभनगरः महाकुंभ में नाबालिग लड़की को संन्यास की दीक्षा दिलाने वाले महंत कौशल गिरी को श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा ने सात साल के लिए अखाड़े से बाहर कर दिया है। अखाड़ा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरी ने बताया कि अखाड़े की परंपरा नहीं रही है कि किसी नाबालिग को संन्यासी बना दें। इस मुद्दे पर बैठक कर सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है।

उन्होंने नाबालिग को गलत तरीके से शिष्य बनाया था। दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम के माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में दान की परंपरा अति प्राचीन है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए एक दंपति ने सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए शैव संप्रदाय श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा को दान कर एक नया इतिहास रचा था लेकिन लड़की का संन्यास वापस कर महंत को सात साल के लिए अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि मंहत कौशल गिरी अब मेला क्षेत्र में जूना अखाड़े के शिविर में भी नही रह सकते हैं। उन्हें अपनी व्यवस्था कहीं अन्य करना होगा। गौरतलब है कि आगरा के फतेहाबाद में ढ़ौकी निवासी पुत्री के साथ महाकुंभ में पहुंचे दंपति संदीप सिंह पेठा व्यापारी हैं। पत्नी रीमा गृहस्थ हैं। इनकी दो बेटियां राखी और निक्की है।

गुरू कौशल गिरी की सेवा में परिवार पिछले चार साल से है। वहीं उन्होंने मुहल्ले में श्रीमदभागवत कथा कराई और भंडारा भी कराया था। उसी समय से मन में भक्ति की भावना जागृत हुई थी। यह परिवार 26 दिसंबर को महाकुंभ मे में पहुंचा है। पिता संदीप राठौर ने बताया कि बडी बेटी राखी के मन में अध्यात्म की लौ जगी और उसने साध्वी बनने की अपनी मंशा व्यक्त किया।

उसकी इच्छा पूरी करने के लिए कौशल गिरी के माध्यम से गंगा स्रान कराने के बाद वैदिक मंत्रों के साथ राखी को झूंसी स्थित सेक्टर 20 में प्रवेश कराया और उसका राखी नामांकरण के बाद वह साध्वी गौरी बन गयी। उन्होंने बताया कि मां-बाप के लिए बच्चों की इच्छा सर्वोपरि होती है।

जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरी का कहना है कि परिवार ने बिना किसी दबाव के बेटी का दान किया है। परिवार की स्वेच्छा से राखी को स्वीकार किया गया है। उन्होंने इस घटना को सनातन धर्म के प्रचार प्रसार का महान उदाहरण बताया। उन्होंने बताया कि साध्वी बनने के लिए राखी का पिण्ड दान 19 जनवरी को शिविर में होना था। उसके सभी धार्मिक संस्कार भी कराए जाते।