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बंगाल में स्मार्ट मीटर लगाना बंद किया गया

ग्राहकों के मिली शिकायतों पर सतर्क हुई राज्य सरकार

  • सबसे अधिक बिल आने की शिकायत

  • कई श्रमिक संगठनों ने भी विरोध जताया

  • पर्दे के पीछे से निजीकरण का आरोप लगा

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः राज्य के अलग अलग इलाके से तरह-तरह की शिकायतें आ रही हैं। इस पर राज्य सरकार का ध्यान गया था। जिसका परिणाम है कि यह काम फिलहाल रोक दिया गया है। बिजली विभाग ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगे हैं कि इससे बिजली का बिल ज्यादा आ रहा है।

इस माहौल में राज्य के बिजली विभाग ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि सरकारी या व्यावसायिक संस्थानों के अलावा अन्य उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। उन्होंने बताया है कि कुछ शिकायतें मिलने के बाद जरूरी कदम उठाने के लिए यह फैसला लिया गया है।

विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में राज्य के इस कदम की आलोचना की है। राज्य के बिजली विभाग की अधिसूचना में बताया गया है कि व्यावसायिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और दूरसंचार टावरों जैसी जगहों पर स्मार्ट मीटर ‘सफलतापूर्वक’ लगाए गए हैं। उसके बाद प्रायोगिक तौर पर तीन-चार जिलों में कुछ उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए भी गए थे। उन्होंने कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया है।

हाल ही में हुगली के बंदेल में एक उपभोक्ता ने शिकायत की कि उसके घर में स्मार्ट मीटर लगाने के बाद उसे एक महीने में 12,000 रुपये का बिजली बिल मिला। इसको लेकर विपक्षी भाजपा, सीपीएम और कांग्रेस ने एक साथ विरोध प्रदर्शन किया। सीपीएम ने आरोप लगाया कि जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाकर राज्य की बिजली सेवा का निजीकरण किया जा रहा है।

सीपीएम के मजदूर संगठन सीआईटीयू से जुड़े संगठनों पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत मेन्स यूनियन और पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत शिल्प सहायक यूनियन और पेंशनर्स समाधान समिति ने आरोप लगाया कि राज्य बिजली विभाग राज्य के लोगों को जबरन प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर रहा है।

सीपीएम संगठन ने आगे आरोप लगाया कि अगर मीटर में कोई खराबी है, तो उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना होगा। अगर यह मुद्दा पूरी तरह से लागू हो जाता है, तो बिजली उपभोक्ताओं को किसी भी समस्या के समाधान के लिए जल्दी करना होगा। बिजली की कीमत भी मांग के अनुसार घट-बढ़ेगी, जिससे आम लोगों को परेशानी होगी।

किसान खास तौर पर प्रभावित होंगे। इसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादों की कीमतों में काफी वृद्धि होगी, ऐसा वामपंथी संगठनों का दावा है। राज्य के ऊर्जा मंत्री अरूप विश्वास ने इस आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आरोप निराधार है। इस बार राज्य ने अधिसूचना जारी कर स्मार्ट मीटर लगाने के संबंध में एक नए फैसले की घोषणा की। अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद शुभेंदु ने एक पोस्ट के जरिए चुटकी ली। राज्य ने फिलहाल उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने को कहा है।