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राजधानी के बहुत करीब राष्ट्रीय पक्षी का बसेरा जंगल में

खूंटी के जंगल बने राष्ट्रीय पक्षी का नया ठिकाना

  • मोरों की चहलकदमी और ग्रामीण अनुभव

  • खूंटी-सिमडेगा के जंगल मोरों के लिए आदर्श

  • कानूनी संरक्षण और डीएफओ की चेतावनी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड के खूंटी जिले के घने वन इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। इसकी वजह है राष्ट्रीय पक्षी मोर की बढ़ती मौजूदगी, जो यहां की जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा रही है। खूंटी के मुरहू प्रखंड में पतकी ईकिर, घघारी, जाते और कोनवा गांवों के बीच फैले जंगलों से लेकर अड़की प्रखंड के बेड़ाहातू, कोचांग, मदहातू और सदर प्रखंड के सिरकापिड़ी जैसे इलाकों में मोर आसानी से देखे जा सकते हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, मोर अक्सर पतकी ईकिर की झीलनुमा बनई नदी के किनारे पानी पीते हुए दिखाई देते हैं। घघारी गांव के पौलुस बोदरा बताते हैं कि यहां मोर अच्छी-खासी संख्या में हैं और लोग उन्हें रोज़ देखते हैं। सिरकापिड़ी के जंगलों से ग्रामीण मोर के अंडे लाकर मुर्गियों से सेतवाते हैं, जिससे मोर के बच्चे पलते-बढ़ते हैं और बड़े होने पर वापस जंगल में लौट जाते हैं।

राज्य के विशेष कार्य पदाधिकारी एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अर्जुन बड़ाईक ने बताया कि खूंटी और सिमडेगा के जंगल मोरों के लिए एकदम उपयुक्त हैं। यहां की जलवायु और समृद्ध जैव विविधता उन्हें पर्याप्त भोजन और सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराती है। मोर दाना, कीड़े-मकोड़े, सांप, बिच्छू, छिपकली, घास के बीज, चिरौंजी, फल और केंचुए खाते हैं, जिससे वे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होते हैं।

मोरनी ज़मीन पर बने छोटे गड्ढों में सूखे पत्ते इकट्ठा कर अंडे देती है। एक बार में वह 10 से 12 अंडे देती है और उन्हें 28 से 30 दिनों तक सेती है। चूजे निकलने के बाद मोरनी उनकी पूरी देखभाल करती है। प्रकृति का यह अद्भुत नज़ारा देखना किसी सौभाग्य से कम नहीं होता।

वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत मोर एक संरक्षित प्राणी है। इसे मारना, पकड़ना, अंडे नष्ट करना, पंख उखाड़ना या इसका व्यापार करना एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए अधिकतम दो साल की जेल या एक लाख रुपये जुर्माना, या दोनों की सज़ा हो सकती है। खूंटी के वन प्रमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार यादव ने बताया कि जिले में मोरों की कोई निश्चित गणना नहीं है, लेकिन अगर किसी ने मोर को नुकसान पहुंचाने, पकड़ने या व्यापार करने की कोशिश की, तो उसके खिलाफ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।