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सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद को एक साल का सेवा विस्तार

तीन सदस्यों की बैठक में नहीं बनी किसी एक नाम पर सहमति

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: नए प्रमुख की नियुक्ति पर आम सहमति न बन पाने के कारण केंद्र सरकार ने बुधवार को सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया। कर्नाटक कैडर के 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी सूद को मूल रूप से इस साल 24 मई को अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करना था।

हालांकि, उच्चस्तरीय चयन समिति द्वारा विचार-विमर्श के बाद उनके उत्तराधिकारी पर निर्णय अंतिम रूप नहीं लिया जा सका। एक सरकारी बयान में कहा गया, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने समिति की सिफारिशों के आधार पर श्री प्रवीण सूद, आईपीएस (केएन:1986) के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक के रूप में कार्यकाल में 24.05.2025 से आगे एक साल की अवधि के लिए विस्तार को मंजूरी दे दी है।सीबीआई

सीबीआई निदेशक का चयन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति द्वारा किया जाता है और इसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। इन तीनों की बैठक हाल ही में हुई थी पर अब यह स्पष्ट हो गया है कि उस बैठक में किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पायी थी।

इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना से अगले नियुक्त व्यक्ति को अंतिम रूप देने के लिए मुलाकात की। हालांकि, कथित तौर पर बैठक बिना किसी आम सहमति के समाप्त हो गई। 1964 में जन्मे प्रवीण सूद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान  दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। वे 1986 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए और 1989 में मैसूर में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया।

कर्नाटक में पदस्थ रहते हुए कई कारणों से वह कांग्रेस और खास तौर पर कर्नाटक के वर्तमान उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निशाने पर आ गये थे। शायद इसी वजह से वहां की भाजपा सरकार के जाते ही वह भागे भागे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली आ गये थे। जहां मोदी सरकार ने उन्हें सीबीआई का निदेशक बनाया था।