फसल काट लेने के साथ साथ बंकरों की सफाई
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः पाकिस्तानी सीमा के करीब बसे गांव के लोगों का काम बढ़ गया है। अपने पूर्व अनुभव के आधार पर वे अब गांव के करीब बनाये गये बंकरों की सफाई कर रहे हैं। जिन बंकरों की सफाई हो चुकी है, वहां गांव वाले अपने लिए रसद भी एकत्रित करते जा रहे हैं। दरअसल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में अलर्ट मोड पर काम हो रहा है। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पाकिस्तानी सीमा से सटे गांवों के लोगों ने पुराने बंकरों की सफाई शुरू कर दी है।
अरिना के गांव ट्रेवां में रहने वाले एक स्थानीय निवासी ने बताया कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए बंकरों में पहले गोलीबारी के समय शरण ली जाती थी। अब पहलगाम की घटना के बाद फिर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
कभी भी कुछ भी हो सकता है- स्थानीय स्थानीय लोगों ने कहा कि लंबे समय से सीमा पर शांति बनी हुई थी, इसलिए बंकरों का उपयोग बंद कर दिया गया था। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए जिसमें कभी भी कुछ भी हो सकता है, तो अब फिर से बंकरों को साफ किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सिंगल बंकर तो तुरंत तैयार हो जाते हैं, लेकिन कम्युनिटी बंकरों को दुरुस्त करने में वक्त और मेहनत लगती है। स्थानीय ग्रामीणों ने पहलगाम हमले को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर भारत इसका बदला नहीं लेता है, तो यह हमारे लिए शर्मनाक होगा।
चूंकि हम सीमा के पास रहते हैं, इसलिए किसी भी स्थिति का सबसे पहला असर हम पर पड़ेगा। इसलिए हम पूरी तैयारी के साथ रहना चाहते हैं। हम सरकार के हाथ नहीं बांधना चाहते- स्थानीय स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत सरकार को चिंता करने की जरूरत नहीं है कि बॉर्डर पर बसे लोग सुरक्षित रहेंगे या नहीं।
हम सरकार या सेना का मनोबल गिराने वाले किसी भी विचार के खिलाफ हैं। अब जो भी हो, उसे आर-पार की लड़ाई के रूप में लिया जाए, क्योंकि आतंकियों ने निहत्थे नागरिकों पर हमला कर बेहद दुखद और निंदनीय कृत्य किया है।
उधर, पहलगाम हमले के बाद सेना भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है। आतंकियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। शोपियां में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शाहिद अहमद के घर को ध्वस्त कर दिया गया। यह आतंकी 2023 से सक्रिय है और सुरक्षा बलों के निशाने पर है।
इस बीच सीमा सुरक्षा बल ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर किसानों को एक तत्काल निर्देश जारी किया कि वे 48 घंटे के भीतर कटाई पूरी कर लें और अपने खेतों को साफ कर लें, क्योंकि पिछले सप्ताह पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद तनाव बढ़ गया है जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे।
सुरक्षा बढ़ाए जाने से सीमा पर बाड़ और शून्य रेखा के बीच संवेदनशील क्षेत्र में कृषि भूमि वाले हजारों किसान प्रभावित होंगे – यह पंजाब के सीमावर्ती समुदायों के लिए एक अनूठी चुनौती है, जो 530 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार लगभग 45,000 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं।
अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का जिलों के गांवों के गुरुद्वारों में किसानों को चेतावनी देते हुए घोषणाएं प्रसारित की गईं कि इन अग्रिम क्षेत्रों में प्रवेश द्वार जल्द ही बंद कर दिए जाएंगे, जिससे स्थिति और बिगड़ने पर उनकी जमीनों तक पहुंच अनिश्चित काल के लिए कट सकती है।
सीमावर्ती गांव भंगाला के किसान रघबीर सिंह भंगाला ने कहा, बीएसएफ के जवान पिछले दो दिनों से किसानों पर खेतों में काम खत्म करने का दबाव बना रहे हैं और उन्हें बता रहे हैं कि हालात नाजुक होने के कारण द्वार बंद कर दिए जाएंगे।