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राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक स्थगित

वक्फ विधेयक पारित होने के बाद ऊपरी सदन में कार्रवाई

  • बंगाल के शिक्षकों की नियुक्ति का मामला उठा

  • सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों की विदाई का उल्लेख

  • इस बार सदन ने सत्र में कुल 159 घंटे काम किया

नईदिल्लीः राज्यसभा के 267वें सत्र की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी। सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए कि बजट सत्र में सदन की उत्पादकता 119 प्रतिशत रही है। सत्र का समापन वंदे मातरम् की धुन के साथ हुआ।

इससे पहले उन्होंने सदन में शीघ्र सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों का विदाई उल्लेख किया। सत्र के अंतिम दिन सदन में पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द होने को लेकर हंगामा भी हुआ और सदन की कार्यवाही सुबह दो बार स्थगित की गयी। राज्यसभा का यह सत्र 31 जनवरी को आरंभ हुआ था और चार अप्रैल को समाप्त हो गया।

श्री धनखड़ ने कहा कि इस सत्र में बहस और संवाद में अलग-अलग राय के उदाहरण देखने को मिले। एक लंबे अंतराल के बाद, सदन में स्वागत योग्य बुद्धिमत्ता, हास्य, व्यंग्य और हाजिर जवाबी के अलावा बौद्धिक के साथ-साथ संसदीय शिष्टाचार, अंतर-दलीय सहयोग और विधायी कठोरता भी देखी गई।

उन्होंने बताया कि सदन ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर तीन दिनों तक गहन बहस की, जिसमें 73 सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2025-26 पर भी तीन दिनों तक विचार-विमर्श समान रूप से व्यापक रहा और इसमें 89 सदस्यों ने विचार-विमर्श किया। सदन में सरकार के चार प्रमुख मंत्रालयों के कामकाज पर भी गहन चर्चा की गयी। इस सत्र में 49 निजी सदस्यों के विधेयक पेश किए जाने का विशेष उल्लेख किया जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, सदन ने कुल 159 घंटे काम किया। इस सत्र की उत्पादकता 119 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि तीन अप्रैल को राज्यसभा ने विधायी इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया, जिसमें सुबह 11:00 बजे से अगले दिन सुबह 4:02 बजे तक अभूतपूर्व बैठक हुई। यह सदन के इतिहास में सबसे लंबी बैठक थी। इस मैराथन बैठक के दौरान, सदन ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पारित किया। उन्होंने कहा कि यह सत्र अपनी ऐतिहासिक विधायी उपलब्धियों और एकता की भावना के लिए याद किया जाएगा।