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हम बोलेगा तो बोलोगे के बोलता है

बोलेगा तो क्यों बोलते हो कि बोलता है। जी हां मैं मस्क साहब के नये ए आई चैटबॉट की बात कर रहा हूं। लगता है भाई साहब ने भारतीय माहौल का बहुत गहन अध्ययन किया है। इसी वजह से जो जिस अंदाज में सवाल करता है, उसे उसी अंदाज में उत्तर भी देते हैं। जाहिर है कि अनेक लोगों को इस सच बोलने से परेशानी होने लगी है क्योंकि लच्छेदार बातों के साथ जो झूठ वे परोसा करते थे, उनपर पानी फिरता जा रहा है।

किसी बात पर कुछ बोले तो भारत का मैंगो मैन तुरंत ग्रोक से उस पर तथ्य जान लेता है। लिहाजा झूठ परोसने का धंधा कमजोर पड़ता जा रहा है। लेकिन मुझे कंफ्यूजन इस बात को लेकर है कि एलन मस्क का यह हथियार इस तरीके से काम क्यों कर रहा है। भारत में भारतीय मुद्दों पर सवाल करने वालों ने कभी उससे डोनाल्ड ट्रंप के नये फैसलों को बारे में जानना चाहा है क्या। चीन के डीपसीक की जांच हो चुकी है कि चीन के आंतरिक राजनीतिक मुद्दों पर वह पक्षपात करता है। इसलिए अभी ग्रोक भइया की असली परीक्षा तो अमेरिकी संदर्भ में होना शेष है।

इस बीच सच बोलने के मुद्दे पर असली सवाल यह है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के बाद का असली सच क्या है। घटना के करीब एक सप्ताह बाद खबर आयी कि वहां से ढेरो नकदी मिली है क्योंकि आग लगने के बाद नियम के तहत दमकल वालों ने घर के नुकसान का अंदर जाकर जायजा लिया था।

बाद में अब यह रकम पचास करोड़ बतायी गयी पर किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की। अब तो दमकल विभाग के प्रमुख कहने लगे हैं कि वहां कोई पैसा दमकल वालों ने नहीं देखा था। आगे की जानकारी दिल्ली पुलिस दे सकती है। आनन फानन में सुप्रीम कोर्ट से यह खबर निकली कि दिल्ली से उनका तबादला इलाहाबाद कर दिया गया है।

इलाहाबाद के वकीलों ने नाराजगी जतायी और कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट कोई कचड़े का डब्बा नहीं है कि सारा कचड़ा यहां डाल दिया जाए। अब कहा जा रहा है कि स्थानांतरण प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन है। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय उस रिपोर्ट की जांच करेगा। इस दौरान खुद न्यायमूर्ति शर्मा अदालत से दूर रहे और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस बारे में कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया है। इसलिए कौन क्या बोल रहा है और सच क्या है, इस पर बहुत कंफ्यूजन है।

इसी बात पर वर्ष 1974 में बनी फिल्म कसौटी का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था वर्मा मलिक ने और संगीत में ढाला था कल्याणजी आनंदजी ने। इसे किशोर कुमार ने अपने अलग अंदाज में गाया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं

हम बोलेगा तो बोलोगे के बोलता है
एक मेमसाब है, साथ में साब भी है
मेमसाब सुन्दर-सुन्दर है, साब भी खूबसूरत है
दोनों पास-पास है, बातें खास-खास है
दुनिया चाहे कुछ भी बोले, बोले
हम कुछ नहीं बोलेगा
हम बोलेगा तो…
हमरा एक पड़ोसी है, नाम जिसका जोशी है
वो पास हमरे आता है, और हमको ये समझाता है
जब दो जवाँ दिल मिल जाएँगे, तब कुछ न कुछ तो होगा
जब दो बादल टकराएंगे, तब कुछ न कुछ तो होगा
दो से चार हो सकते है, चार से आठ हो सकते हैं, आठ से साठ हो सकते हैं
जो करता है पाता है, अरे अपने बाप का क्या जाता है
जोशी पड़ोसी कुछ भी बोले, बोले
हम तो कुछ नहीं बोलेगा
हम बोलेगा तो…
मेरी बुढ़िया नानी थी, लेकिन वो बड़ी सयानी थी
गोदी में मुझे बिठाती थी और सच्ची बात सुनाती थी
जब साल सतरवां लागेगा, दिल धड़क-धड़क तो करेगा
किसी सुंदरी से नैनवा लड़ेगा, दिल खुसुर-फुसुर भी करेगा
जब आग से घी मिलेगा, फिर तो वो भी घी पिघलेगा
पिघलेगा जी पिघलेगा
न आग से न घी से, हमको क्या किसी से
नानी चाहे कुछ भी बोले, बोले
हम कुछ नहीं बोलेगा
हम बोलेगा तो…

तो भइया कौन क्या बोल रहा है इस पर नजर लगाये रखना भी जरूरी है। वरना आजकल तो बोलकर भी मुकर जाने का नया फैशन चल पड़ा है। पहले तो सिर्फ नेता लोग ही बोलकर मुकर जाते थे। लेकिन वीडियो में अगर राष्ट्रगान के वक्त नीतीश कुमार अजीब हालत में नजर आ रहे हैं तो इस पर कौन क्या बोलेगा। पहले मोदी जी ने नवीन पटनायक की हालत पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी और अब नीतीश कुमार का यह वीडियो देखने के बाद मोदी जी या किसी और ने राष्ट्रभक्ति में अब तक कुछ नहीं कहा तो उस पर भी इंडिया के मैंगो मैन को कुछ न कुछ तो बोलना पड़ेगा। परेशानी है कि बोलेगा तो खास लोग बोलने लगेंगे कि फिर से बोलता है।