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रघुवर दास की वापसी से कौन से समीकरण बदलेंगे

आजसू के भविष्य पर भी उठ रहे सवाल

  • सिंहभूम में अर्जुन मुंडा का जोर

  • सुदेश के साथ रिश्ते बिगड़े रहे हैं

  • बाबूलाल व अन्य पर भी लगी है नजर

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पूर्व मुख्यमंत्री और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने दोबारा से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। एक भव्य समारोह में इस योगदान के दौरान भी भावी समीकरणों के जोड़ तोड़ पर लोग अपना अपना अनुमान लगाते रहे।

भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी अब कोई इस बात से इंकार नहीं करता कि इससे पार्टी के अंदर फिर से नये किस्म की गुटबाजी उभरेगी और सिंहभूम के इलाकों में होने वाले बदलाव की तरफ अधिकांश लोगों की नजर रहेगी।

वैसे अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर इस योगदान के बाद श्री दास को प्रदेश अथवा राष्ट्रीय स्तर पर कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी। उनके राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद दो चर्चाएं आम हुई थी।

पहली चर्चा उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने की थी और दूसरी चर्चा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी की थी। केंद्रीय नेतृत्व ने इन दोनों चर्चाओं पर अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

जाहिर है कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव फिलहाल भाजपा के लिए अधिक महत्वपूर्ण विषय हैं। लिहाजा माना जा सकता है कि वहां के चुनाव निपट जाने के बाद ही ऐसे विषयों पर केंद्रीय नेतृत्व ध्यान देगा।

अब सिंहभूम की गतिविधियों पर हो रही चर्चा के बीच यह ध्यान देना जरूरी है कि पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम में बिना अर्जुन मुंडा के पार्टी को पहले की तरह मजबूत स्थिति में पहुंचाना संभव नहीं होगा, ऐसा अनेक लोग मानते हैं।

दूसरी तरफ पुराने लोग यह शिकायत करने से भी नहीं चूकते कि सिर्फ अर्जुन मुंडा की वजह से ही मधु कोड़ा भाजपा से नाराज हुए थे और नाराजगी का असर यह हुआ था कि वह इस राज्य में निर्दलीय विधायक होते हुए भी मुख्यमंत्री बने थे। सिंहभूम के दूसरे कद्दावर नेता बताये गये चंपई सोरेन का राजनीतिक भविष्य क्या होगा, इस पर भाजपा के लोगों को भी संदेह है।

असली मुद्दा भाजपा और आजसू के रिश्तों का है। रघुवर दास समर्थक एक खेमा बार बार यह दलील देता फिर रहा है कि अब सुदेश महतो के दिन खत्म हो चुके हैं। इसलिए जल्द ही आजसू का भाजपा में विलय हो जाएगा। इस दलील के पीछे का तर्क महतो वोट पर उनकी पकड़ कमजोर होने तथा राज्य में नया युवा महतो नेता के उभरने का है।

दूसरी तरफ रघुवर दास और सुदेश महतो के बीच जो 36 का रिश्ता है, वह भी कोई गोपनीय बात नहीं है। ऐसे में रघुवर दास की वापसी के बाद सुदेश महतो का अगला कदम क्या होगा, इस पर लोगों की नजरें लगी हुई है। साथ ही बाबूलाल मरांडी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता इसके बाद कहां स्थान पायेंगे, इस पर आज के समारोह में भी चर्चा का माहौल बना रहा। कुल मिलाकर रघुवर दास को क्या जिम्मेदारी मिलती है, इस पर भाजपा का झारखंड में बहुत कुछ निर्भर करेगा।