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सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी जारी

ग्रामीणों से बीजीबी की धमकी के बाद भी बाड़ लगाया

  • कई बार दोनों पक्षों की बैठक

  • खुला इलाका तस्करों का स्वर्ग

  • दोनों तरफ से आक्रामक नारेबाजी

राष्ट्रीय खबर

कूचबिहारः बांग्लादेश सीमा पर अभी हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। दोनों तरफ से रक्षा बलों के साथ साथ ग्रामीण भी एख दूसरे के आमने सामने आ गये हैं। सामने खड़ी बीजीबी के हथियार बंद फौज के सामने ही ग्रामीणों ने बांग्लादेशी तस्करों को रोकने के लिए सीमा पर बाड़ लगा दी। बांग्लादेशी तस्करों पर आरोप है कि उन्होंने भारत में घुसकर लूटपाट की।

समस्या के समाधान के लिए शनिवार को किसान स्वयं कंटीले तार खरीदने गए और शून्य रेखा के पास अपनी जमीन पर बाड़ लगाने लगे। कथित तौर पर, बीजीबी ने उन्हें भूमि को घेरने से रोक दिया। बीएसएफ के जवान भारतीय किसानों के साथ खड़े रहे।

ग्रामीणों ने बांग्लादेशी सीमा रक्षकों की धमकियों को नजरअंदाज करते हुए कूचबिहार सीमा पर अपनी जमीन पर कांटेदार तार की बाड़ लगा दी, जिसकी सुरक्षा बीएसएफ द्वारा की जा रही है। शुक्रवार को कूचबिहार के मेखलीगंज स्थित कुचलीबाड़ी के ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा पर अपनी जमीन पर बाड़ लगा दी। उन्होंने शून्य रेखा के पास लगभग डेढ़ किलोमीटर भूमि को कांटेदार तार की बाड़ से घेर दिया। इस काम को बीजीबी के विरोध की वजह से कई बार रोका गया था। इस दौरान बीएसएफ और बीजीबी के कई बार फ्लैग मीटिंग भी हुई।

ग्रामीणों का दावा है कि असुरक्षित सीमा से घुसपैठ और पशु तस्करी खुलेआम हो रही है। बांग्लादेशी तस्कर भारतीय किसानों की फसलें भी काटकर ले गए। कूचबिहार में भारत-बांग्लादेश सीमा का एक बड़ा इलाका अभी भी असुरक्षित है। यहां तक ​​कि एन्क्लेवों के आदान-प्रदान के बाद भी कई स्थानों पर सीमा अभी भी असुरक्षित है।

कुचलीबाड़ी, मेखलीगंज में भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करी और घुसपैठ भी होती है। यहां तक ​​आरोप लगाया जाता है कि बांग्लादेशी तस्कर वहां से भारत में प्रवेश करते हैं और लूटपाट करते हैं। समस्या के समाधान के लिए शनिवार को किसान स्वयं कंटीले तार खरीदने गए और शून्य रेखा के पास अपनी जमीन पर बाड़ लगाने लगे।

कथित तौर पर, बीजीबी ने उन्हें भूमि को घेरने से रोक दिया। बीएसएफ के जवान भारतीय किसानों के साथ चौकसी पर थे। संयुक्त प्रतिरोध के कारण बांग्लादेशी सेनाएं पीछे हट गईं। इसके बाद किसानों ने स्वयं श्रमदान कर सीमा पर डेढ़ किलोमीटर लंबी कंटीली तार की बाड़ बना दी।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बांग्लादेशी तस्करों की मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र में रहना मुश्किल हो गया है। वे कभी-कभी भारत में घुसपैठ करते हैं और विभिन्न अपराधों में संलिप्त रहते हैं। इसके अलावा तस्करी और घुसपैठ भी जारी है। बांग्लादेशी तो फसल भी काटकर ले गए। बीएसएफ इस समस्या के समाधान के लिए लंबे समय से वहां कंटीले तार की बाड़ लगाने का प्रयास कर रही थी। लेकिन बी.जी.बी. के अवरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए आज हमने अपनी ही जमीन को कंटीले तारों से घेर लिया है।

बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स के साथ आयोजित बैठक में बीएसएफ की ओर से आईजी (दक्षिण बंगाल) मनिंदर पीएस पवार बेनापोल बैठक में उपस्थित थे। ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हुमायूं कबीर बीजीबी की ओर से उपस्थित थे। मालदा के कालियाचक-3 ब्लॉक के बाखराबाद पंचायत में सुकदेवपुर सीमा चौकी (बीओपी) से लगभग डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में बांग्लादेश के साथ सीमा व्यावहारिक रूप से खुली है, क्योंकि मोरनगंगा नदी इस क्षेत्र से होकर गुजरती है।

मंगलवार को बीजीबी पर वहां बाड़ लगाने के लिए गड्ढे खोदने में बाधा डालने का आरोप लगाया गया। इससे क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया है। यद्यपि बुधवार को काम शुरू हो गया था, लेकिन बीजीबी की बाधाओं के कारण दोपहर के समय इसे फिर रोक दिया गया था। चिंता की बात यह है कि बार बार इन इलाकों में दोनों पक्षों के ग्रामीण भी लाठी डंडा लेकर सामने आ रहे हैं और इसके बीच उत्तेजक नारेबाजी भी हो रही है।