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यूनियन कार्बाइड के कचरे के निष्पादन की तैयारी

भोपाल गैस त्रासदी का इतिहास जान पहले से लोग आशंकित

  • उच्च न्यायालय के निर्देश का पालन

  • प्रदूषण से बचाने के सारे उपाय हैं

  • स्थानीय संगठनों ने विरोध जताया

राष्ट्रीय खबर

भोपालः मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड के सैकड़ों टन कचरे के इंदौर के नजदीक पीथमपुर में निष्पादन की सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस संबंध में गैस राहत विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में उच्च न्यायालय की ओर से तीन दिसंबर को आदेश प्राप्त हुए थे।

यहां स्थित यूनियन कार्बाइड परिसर में 337 टन वेस्ट को पीथमपुर ले जाकर उसका निष्पादन करना है। इसके परिवहन का काम उच्च न्यायालय के आदेश के चार सप्ताह के बाद का था। उसे समयसीमा में करने की पूरी तैयारियां चल रही हैं।  उन्होंने बताया कि कचरे के पैकिंग और उसके परिवहन की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। उसी तरह उसे ले जाया जाएगा। सुरक्षा की दिशा से भी अलग से व्यवस्था की गई है। इससे बाहर प्रदूषण ना फैले, इसका पूरी तरह ध्यान रखा जा रहा है।

उच्च न्यायालय की ओर से दी गई समयसीमा के मुताबिक कार्य किया जाएगा।  अधिकारी ने बताया कि भोपाल से पीथमपुर तक का 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। सरकार को इस संबंध में तीन जनवरी को न्यायालय में शपथ पत्र प्रस्तुत करना है, उसी के अनुरूप काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य पूरे कचरे को तीन जनवरी के पहले वहां पहुंचाने का है।

उन्होंने पीथमपुर के नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि ये जहरीला कचरा पेस्टिसाइड का अवशेष है। गैस त्रासदी मिथाइल आइसोसायनेट गैस के लीकेज के कारण हुई थी। ये गैस पेस्टिसाइड के निर्माण के लिए इस्तेमाल होती थी। अब जो कचरा वहां पड़ा  है, उसकी विषाक्तता को भी चेक किया गया है। इसके पहले भी विभिन्न वैज्ञानिकों की मौजूदगी में जांच की गई थी। इस पूरी जांच के जो परिणाम आए, वो किसी भी तरह हानिकारक नहीं थे। उन्होंने कचरा निष्पादन का वैज्ञानिक तरीका बताते हुए कहा कि इसके कोई दुष्प्रभाव स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंचेंगे।

इसी बीच विभिन्न गैस संगठनों ने सरकार के इस कदम का विरोध भी शुरु कर दिया है। भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति संयोजक साधना कार्णिक ने संवाददाताओं से कहा कि इस जहरीले कचरे को इंदौर भेजने की बजाए अमेरिका भेजा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि जिस कंपनी को कचरा निष्पादन की जिम्मेदारी दी गई है, वो इसके पहले ही 2015 में कचरे के परीक्षण के दौरान उसे जला कर इंदौर की जमीन को विषैला बना चुकी है।