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प्रदर्शनकारी किसानों ने मार्च को एक दिन रोका

शंभु बॉर्डर पर फिर हुआ टकराव, आंसू गैस के गोले से घायल

  • कई स्तरों पर की गयी है बैरिकेडिंग

  • पहचान पत्र मांगने से नाराज किसान

  • मीडिया को भी वहां जाने से रोका गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रदर्शनकारी किसानों ने एक दिन के लिए दिल्ली चलो पैदल मार्च स्थगित किया है। पंजाब-हरियाणा सीमा पर शंभू में आंसू गैस के गोले दागे जाने के कारण कुछ किसानों के घायल होने के बाद किसानों ने 8 दिसंबर, 2024 को ‘दिल्ली चलो’ मार्च स्थगित कर दिया।

इससे पहले, 101 किसानों के एक जत्थे ने रविवार दोपहर (8 दिसंबर, 2024) को पंजाब-हरियाणा सीमा पर शंभू विरोध स्थल से दिल्ली के लिए अपना पैदल मार्च फिर से शुरू किया, लेकिन हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों द्वारा लगाए गए बहुस्तरीय बैरिकेडिंग के कारण जल्द ही उन्हें रोक दिया गया।

बैरिकेड्स पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए और तोपों से पानी की बौछारें की गईं। उन्होंने कहा कि नोएडा सीमा पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के किसानों का एक और समूह वहां विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

एमएसपी के अलावा, किसान कृषि ऋण माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, पुलिस मामलों (किसानों के खिलाफ) को वापस लेने और 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए “न्याय” की मांग कर रहे हैं।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी उनकी मांगों में शामिल है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अलावा, किसान कृषि ऋण माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, पुलिस मामलों (किसानों के खिलाफ) को वापस लेने और 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए “न्याय” की मांग कर रहे हैं।

भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी उनकी मांगों का हिस्सा है।

किसानों के दिल्ली कूच में हरियाणा पुलिस ने रविवार को जत्थे में शामिल किसानों की पहचान का पेंच फंसा दिया। अंबाला पुलिस नए शंभू सीमा पर किसानों को रोकने के लिए आज भी आँसू गैस, पानी की धार छोड़ी और फूल भी बरसाकर किसानों को शांत करने का प्रयास किया। पुलिस ने दावा किया कि उन्हें किसानों की जो सूची दी गई है, सीमा पर आए लोग वह नहीं थे।

इसलिए पुलिस उनसे पहचान दिखाने को कह रही थी। दूसरी तरफ, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पुलिस झूठ बोल रही है। उन्होंने किसानों के जत्थे में शामिल किसानों की सूची दी हुई है और वही लोग वहाँ पहुंचे थे।  श्री पंधेर ने कहा कि पुलिस का चेकिंग का निर्णय था तो वह उन्हें पहले बता देते।

पंजाब पुलिस ने रविवार सुबह शंभू सीमा पर मीडियाकर्मियों को किसान मोर्चे से दूर ही रोक दिया।  हरियाणा पुलिस ने शनिवार को पंजाब पुलिस को मीडिया कर्मियों की ‘सुरक्षा के मद्देनजर’ उन्हें सुरक्षित दूरी (कम से कम एक किलोमीटर) पर रोकने का अनुरोध किया था। हरियाणा पुलिस का यह भी कहना था कि शुक्रवार को किसानों के जत्थे के साथ मीडियाकर्मियों की भीड़ आ जाने के कारण उन्हें कानून व्यवस्था संभालने में बहुत दिक्कत आई।

किसान नेताओं का आरोप है कि केंद्र व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकारें पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के साथ मिलकर किसानों की आवाज को दबाने के लिए मीडिया को रोक रही हैं। किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैरराजनीतिक) संगठनों की तरफ से 100 किसानों के एक जत्थे ने शुक्रवार को दिल्ली कूच का प्रयास किया था लेकिन हरियाणा पुलिस ने सीमा पर बैरीकेड लगाकर और आँसू गैस व मिर्ची के स्प्रे छिड़ककर किसानों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

काँग्रेस महासचिव और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने रविवार को आरोप लगाया कि सरकार किसानों से बातचीत से बच रही है। कुमारी सैलजा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली कूच करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी स्पष्ट किया है कि किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है और सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए।

इसके बावजूद, सरकार बातचीत से बच रही है। कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा, पंजाब, शंभु और अन्य सीमा बंद कर दिए गए हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि सरकार संवाद के रास्ते बंद कर रही है और जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उल्लेखनीय है कि किसान रविवार को भी हरियाणा पंजाब की सीमाओं पर ‘दिल्ली कूच’ के लिए जद्दोजहद कर रहे थे।