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आज रपट जाएं तो हमें ना.. .. .. ..

 

फिर से चुनावी दंगल सज गया है तो रपटा रपटी, रगड़ा रगड़ी तेज होगी ही।  वैसे भी हरियाणा में इनदिनों पहलवानी का बुखार चढ़ा हुआ है। जाटों की जिद में कहीं भाजपा का धोबिया पछाड़ ना हो जाए। पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट के साथ जो हुआ, उसी का असर हो भी सकता है क्योंकि चुनावी अखाड़े में दोनों तरफ से लोग ताल ठोंक रहे हैं।

वइसे भी राजनीतिक दंगल होता ही इसलिए है कि अपने विरोधी को पछाड़ दिया जाए। कुरसी का खेल भी अजीब है। कौन दोस्त है और कौन दुश्मन, यह हर पांच साल में बदल भी सकता है। अब जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव का क्या परिणाम आयेगा, यह देखने वाली बात होगी लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि खुद भाजपा को भी वहां से बहुत अधिक उम्मीद नहीं है।

बहती गंगा में हाथ धोकर पिछली बार महबूबा मुफ्ती के साथ मिलकर सरकार बना लिया था पर अब माहौल कुछ और ही है। हरियाणा में विनेश फोगाट के अलावा भाजपा के अंदर की घमासान भी अच्छे संकेत नहीं देती है अब महाराष्ट्र और झारखंड रह गया तो दोनों राज्यों से पहले ही आसमान पर बादल छाये होने के संकेत मिल गये थे। शायद इसी वजह से दोनों राज्यों का चुनाव थोड़ा टाला गया है। इन दोनों राज्यों में हालात कितने और कब सुधरेंगे, यह कह पाना कठिन है पर इतना तो तय है कि अगर यहां भी परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं आया तो दिल्ली दरबार की कुर्सी हिलने लगेगी। वैसे भी उस कुर्सी के दो पाये कब खिसक जाएंगे, यह तो शायद भगवान को भी पता नहीं है। इसलिए तो इतना रपटा रपटी का माहौल बना हुआ है। कौन कहां चिपकेगा और कहां बिदकेगा, यह इंपोर्टेंट सवाल बना हुआ है।

 

इसी बात पर सुपरहिट फिल्म नमक हलाल का यह सुपरहिट गीत याद आने लगा है। इस गीत को सुरों में ढाला था बप्पी लाहिरी ने और स्वर दिया था आशा भोंसले और किशोर कुमार ने। अमिताभ बच्चन और स्मिता पाटिल के अभिनय की वजह से यह गीत और भी लोकप्रिय हुआ था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

 

अरे अरे अरे न न न न न न

आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

आज फिसल जायें तो हमें ना उठइयो

हमें जो उठइयो तो, हमें जो उठइयो तो ख़ुद भी रपट जइयो

हाँ ख़ुद भी फिसल जइयो

आज रपट आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

बरसात में थी कहाँ कभी बात ऐसी

पहली बार बरसी बरसात ऐसी 2

कैसी ये हवा चलीस हा पानी में आग लगी, हा

जाने क्या प्यास जगी रे भीगा ये तेरा बदन, हा

जगाये मीठी चुबन रे, हा नशे में झूमें ये मन रे

कहाँ हूँ मैं मुझे भी ये होश नहीं रे

आ हा ओ हो

आ हा ओ हो

आज बहक जायें तो होश न दिलइयो -२

होश जो दिलइयो तो ख़ुद भी बहक जइयो

आज रपट आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

बादल में बिजली बार-बार चमके

दिल में मेरे आज पहली बार चमके

दिल में मेरे आज पहली बार चमके

हसीना डरी-डरी, हा बाँहों में सिपट गई हा

सीने से लिपट गई रे तुझे तो आया मज़ा हा

तुझे तो सूझी हँसी हा मेरी तो जान फँसी रे

जान-ए-जिगर किधर चली नज़र चुरा के

आ हा ओ हो -२

बात उलझ जाये तो आज न सुलझइयो -२

बात जो सुलझइयो तो ख़ुद भी उलझ जइयो

आज रपट आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

बादल से छम-छम शराब बरसे सांवरी घटा से शबाब बरसे

बादल से छम-छम शराब बरसे हो सांवरी घटा से शबाब बरसे

बूँदों की बजी पायल हा घटा ने छेड़ी गज़ल हा

ये रात गई मचल रे

दिलों के राज़ खुले हा फ़िज़ाँ में रंग घुले हा

जवाँ दिल खुल के मिले रे

होना था जो हुआ वही अब डरना क्या

आ हा ओ हो -२

आज डूब जायें तो हमें बचइयो -२

हमें जो बचइयो तो हमें जो बचइयो तो ख़ुद भी डूब जइयो

आज रपट, आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

आज फिसल जायें तो हमें ना उठइयो आ हा ओ हो

 

चलते चलते झारखंड की भी बात कर लें तो भाई लोग हवा पकड़कर कह रहे हैं कि पूर्व सीएम चंपई सोरेन भाजपा में जा रहे हैं। लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि अगर चंपई सोरेन भाजपा में चले भी जाते हैं तो क्या फायदा होगा। बड़ी ताम झाम से सीता सोरेन को भी भाजपा वाले ले गये थे। नतीजा क्या निकला सभी के सामने है। इसलिए कोल्हान में चंपई सोरेन के चले जाने से भी झामुमो की सेहत को क्या फर्क पड़ेगा, इसका आकलन नहीं हुआ है। रही बात कांग्रेस और भाजपा की तो कांग्रेस ने तो अपना अध्यक्ष बदलकर अच्छा किया है। अब भाजपा किसके भरोसे चुनाव लड़ेगी, यह बड़ा सवाल है।