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पूरा एक गांव धीरे धीरे धंस रहा है

सुंदरी कहे जाने वाले नदी का अभी बारिश में राक्षसी स्वरुप


  • इस बार टोटगांव इसकी चपेट में

  • आंगनबाड़ी केंद्र पहले ही धंस गये

  • पानी गांव के अंदर बढ़ता चला आ रहा


राष्ट्रीय खबर

जलपाईगुड़ीः आम तौर पर तीस्ता नदी को यहां प्यार से सुंदरी भी कहा जाता है। शायद यहां के अनेक लोगों की आजीविका और खेती का मुख्य साधन होने की वजह से ही यह नाम प्राचीन काल में मिला है। हर साल बारिश में इस नदी का स्वरुप राक्षसी हो जाता है। इस बार कई कारणों से अब नदी का बहाव अत्यंत खतरनाक अवस्था में है। दरअसल कुछ अरसा पहले सिक्किम में ग्लेशियर डैम के टूटने के बाद से ही इसका स्वरुप बदलने लगा था। अब उत्तर बंगाल और हिमालय के इलाकों में हो रही बारिश की वजह से इस नदी से और खतरनाक रुख अख्तियार कर लिया है।

आम तौर पर तीस्ता हो अथवा गंगा, खेती के मैदान या किनारे बसे गांव की जमीन को लील लेना इनकी प्रकृति है। इस बार यह खतरा बड़े आकार में नजर आने लगा है। नदी की दिशा बदल जाने की वजह से अब नये इलाकों तक पानी फैल रहा है। इसी वजह से अब टोटगांव भी इसकी चपेट में है। यह कोई छोटा इलाका नहीं बल्कि पूरा भरा पूरा गांव है। अचानक से इस गांव के लोगों को तीस्ता के आगे बढ़ते आने का एहसास हो गया है।

इस साल का तीस्ता पूरी टोटगांव बस्ती को अपने गर्भ में समा लेने को आतुर है।  तीस्ता नदी ने गांव की ओर रुख करना शुरू कर दिया है, जिसके कारण तीस्ता नदी में आंगनवाड़ी केंद्र सहित कई घर बह गए हैं। जिससे प्रभावित परिवारों को अपने घर तोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। घर और कृषि भूमि जलमग्न हो गए हैं।

गांव में स्थापित पीने के पानी की टंकी तीस्ता की ओर झुकती जा रही है और ऐसा माना जाता है कि यह किसी समय तीस्ता के पानी में डूबी होती है, इस क्षेत्र की एक तिहाई से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर है। बाढ़ पीड़ितों की मांग है कि सरकार तीस्ता पर अतिक्रमण रोकने के लिए बांध बनाये या हमारे पुनर्वास की व्यवस्था करे. इस संदर्भ में क्षेत्र के निवासी भीम प्रसाद शर्मा ने कहा, क्या हम मिट जायेंगे। लोग मान रहे हैं कि ऐसी ही स्थिति रही तो पूरा गांव नदी में बह जायेगा। ये गांव बंगाल के नक्शे से हमेशा के लिए मिट जाएगा।