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लोगों को भय है कि ब्रह्मपुत्र का पानी रूक जाएगा

स्थानीय निवासी और साधु सन्यासियों ने गलियारे के निर्माण पर चिंता व्यक्त की


  • पीएम मोदी ने कॉरिडोर की आधारशिला रखी थी

  • आईआईटी गुवाहाटी की मंजूरी मिलने पर निर्माण होगा: हिमंत

  • नई कॉरिडोर निर्माण पर हाइड्रोलॉजिकल और भूवैज्ञानिक अध्ययन होगा


भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी :कामाख्या वासियों और साधुओं ने कॉरिडोर के निर्माण पर चिंता जताई है। साधुओं और कामाख्या के निवासियों ने संदेह जताया है कि अगर सरकार नए कॉरिडोर बनाती है तो मां कामाख्या में ब्रह्मपुत्र से आने वाला पानी बंद हो जाएगा। इस कारण मां कामाख्या में परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 फरवरी 2024 को गुवाहाटी के वेटरनरी कॉलेज से मां कामाख्या मंदिर कॉरिडोर की आधारशिला रखी थी। मोदी ने कहा था कि उज्जैन में महाकाल लोक और वाराणसी में काशी विश्वनाथ की तर्ज पर कामाख्या देवी मंदिर का विकास करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। लेकिन हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आईआईटी-गुवाहाटी से उचित मंजूरी मिलने तक प्रस्तावित मां कामाख्या मंदिर पहुंच गलियारे में कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।

गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, कामाख्या कॉरिडोर का काम लार्सन एंड टूब्रो को सौंपा गया है और योजना को मंजूरी के लिए आईआईटी गुवाहाटी को दिया गया है। मुझे लगता है कि 2-3 महीने के भीतर भौतिक काम तभी शुरू होगा जब आईआईटी गुवाहाटी मंजूरी देगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर पर लोगों की चिंता पर आगे बोलते हुए, सरमा ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को लोगों का समर्थन प्राप्त है और 2 साल के भीतर काम पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा, लोग कॉरिडोर शब्द से चिंतित हैं। कॉरिडोर कुछ और नहीं बल्कि एक सड़क है, लोग सोच रहे हैं कि राज्य कुछ असाधारण चीज बनाने जा रहा है। कुछ भी नहीं बदलेगा, केवल छत पर चादरें बिछाई जाएंगी।

इससे पहले, असम सरकार ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय को भी सूचित किया था कि आईआईटी गुवाहाटी से मंजूरी मिलने तक कामाख्या मंदिर पहुंच कॉरिडोर का निर्माण शुरू नहीं होगा, जो ब्लूप्रिंट की जांच करेगा और हाइड्रोलॉजिकल और भूवैज्ञानिक अध्ययन करेगा।