Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
LPG Shortage in India: भारत में गैस किल्लत का असर फास्ट फूड इंडस्ट्री पर, McDonald’s-KFC में मेनू छो... Amazon AI Health Expert: अमेजन ने लॉन्च किया एआई डॉक्टर, घर बैठे मिलेगा डायबिटीज और स्किन केयर टिप्स... Sheetla Ashtami 2026: आज मनाया जा रहा है बसौड़ा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शीतला माता को बासी ... Eid 2026 Fashion Tips: ईद लुक को परफेक्ट बनाने के लिए ये 5 एक्सेसरीज हैं लाजवाब, कश्मीरी चूड़ियों और... पूर्णिया में रिश्तों का कत्ल! हैवान ससुर ने गर्भवती बहू से की दरिंदगी की कोशिश, फिर मार डाला; मुर्गी... मार्च में मई जैसी आग! दिल्ली में पारा 36°C के पार, राजस्थान-गुजरात में 'लू' का अलर्ट; पहाड़ों पर बर्... ग्रेटर नोएडा में फिर मातम: 13वीं मंजिल से कूदी MBA छात्रा! सुसाइड से पहले रात को हुई थी ये बात; परिव... Youtuber Pushpendra Murder Case: दिल्ली में यूट्यूबर पुष्पेंद्र की हत्या, शरीर के गायब अंगों ने उलझा... LPG Crisis in Delhi: दिल्ली के मशहूर पंचम पुरीवाला में गैस संकट, मिडिल ईस्ट वार ने बिगाड़ा 178 साल प... बिहार में 'राज्यसभा' का रण: 5 सीटें और 6 दावेदार! क्या ओवैसी बनेंगे तेजस्वी के लिए 'संकटमोचक' या NDA...

और नहीं बस और नहीं गम .. .. .. ..

और नहीं बस और नहीं, यही मन ही मन दोहरा रहे हैं राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता। सात चरणों का चुनाव वह भी इस भीषण गर्मी में। जान पर आफत आ गयी है। ऊपर से फरमान और नीचे मतदाताओं की फटकार के बीच प्रचार करो, झंडा लगाओ, बूथ की पर्ची पहुंचाओ कितना काम करें। भला हो रात को काम करने वाले युवकों का, जो कमसे कम झंडा टांगने वाला काम ठेका पर कर देते है। गनीमत है कि वह वॉल राईटिंग का प्रचलन नहीं रहा वरना वह भी अतिरिक्त काम करना पड़ता रात को। इनदिनों आवारा कुत्ते भी बढ़ गये हैं, कमीने झूंड बनाकर रात को किसी अजनबी को देखकर घेरने का काम करते हैं।

बेचारा चुनाव आयोग भी सोच रहा होगा कि पता नहीं किस घड़ी सात चरणों के चुनाव का फैसला लिया था। हर एक चरण के पूरा होने के बाद आरोपों की बौछार हो रही है। बेचारे चुपचाप सब कुछ सुनने के लिए मजबूर है और भय इस बात का भी है कि कहीं सरकार बदल गयी तो उनका क्या होगा। परेशानी सिर्फ उनकी ही नहीं है बल्कि दिल्ली पर कब्जा जमाये बैठे दूसरे हाकिमों की भी है। पुरानी फाइलों का क्या करें, जिनमें ढेर सारे राज दफन है।

राजनीति की बात करें तो कोई माने या ना माने पर दम तो सबका फूल गया है। आखिर हर बार चुनावी जनसभा में नया क्या बोले। यह कोई हिंदी फिल्म तो है नहीं कि हर बार के लिए डॉयलॉग लिखने के लिए अलग अलग राइटर बैठे हुए हैं। यहां तो खुद ही सोचकर समझकर बोलना पड़ता है। आम परिवार के काम आने वाले हर चीज की बात तो हो चुकी है। अब नया क्या बोला जाए। इसलिए वे भी बेचारे हांफ रहे हैं पर इलेक्शन है तो कुछ बोल नहीं पा रहे हैं।

इसी बात पर फिल्म रोटी कपड़ा और मकान का यह गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखा था संतोष आनंद ने और संगीत में ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। इसे महेंद्र कपूर ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह है।

और नहीं बस और नहीं, ग़म के प्याले और नहीं

दिल में जगह नहीं बाकी, रोक नजर अपनी साकी तो

और नहीं बस …

सपने नहीं यहाँ तेरे, अपने नहीं यहाँ तेरे

सच्चाई का मोल नहीं, चुप हो जा कुछ बोल नहीं

प्यार प्रीत चिल्लाएगा तो, अपना गला गँवाएगा

पत्थर रख ले सीने पर, क़समें खा ले जीने पर

गौर नहीं है और नहीं, परवानों पर गौर नहीं

आँसू आँसू ढलते हैं, अंगारों पर चलते हैं तो

और नहीं बस और नहीं …

कितना पढ़ूँ ज़माने को, कितना गढ़ूँ ज़माने को

कौन गुणों को गिनता है, कौन दुखों को चुनता है

हमदर्दी काफ़ूर हुई, नेकी चकनाचूर हुई

जी करता बस खो जाऊँ, कफ़न ओढ़कर सो जाऊँ

दौर नहीं ये और नहीं, इन्सानों का दौर नहीं

फ़र्ज़ यहाँ पर फ़र्ज़ी है, असली तो खुदगर्ज़ी है तो

और नहीं बस और नहीं …

बीमार हो गई दुनिया, बेकार हो गई दुनिया

मरने लगी शरम अब तो, बिकने लगे सनम अब तो

ये रात है नज़ारों की, गैरों के साथ यारों की

जी है बिगाड़ दूँ सारी, दुनिया उजाड़ दूँ सारी

ज़ोर नहीं है ज़ोर नहीं, दिल पे किसी का ज़ोर नहीं

कोई याद मचल जाए, सारा आलम जल जाए तो

और नहीं बस और नहीं …

वइसे बस और नहीं बोल भर देने से काम पूरा नहीं होता। यह इंडियन पॉलिटिक्स है जनाब। यहां तो हर शह और मात का खेल चाल के बाद भी बदल जाता है। देख नहीं रहे हैं हर बार चुनाव के अंतिम परिणाम भी बदल रहे हैं। बताइये पांच चरणों में एक करोड़ से ज्यादा मतदान का आंकड़ा बढ़ गया। तो क्या मान ले कि डिजिटल इंडिया का दावा भी किसी चुनावी वादे के जैसा था, जिसकी सच्चाई की जांच अब हो रही है। खैर जो भी हो अब कुछ भी बदला तो नहीं जा सकता। सात चरण का चुनाव है तो है। अब तो चार जून को ही पता चल पायेगा कि ऊंट किस करवट बैठ रही है।

भाई लोगों का एक दूसरे के खिलाफ दावा जारी है। मोदी जी कह रहे हैं कि चुनाव में बहुमत तो हासिल कर चुके हैं। उनसे पहले अमित शाह भी यही बात कह चुके थे। इसके बाद भी उनके चेलों के चेहरों पर परेशानी क्यो हैं पता नहीं। दूसरी तरफ राहुल गांधी और उनकी टीम दावा कर रही है कि चार जून को मोदी जी जाने वाले हैं। अब इनमें से सच क्या है यह तो रिजल्ट निकलने के बाद ही पता चलेगा। वैसे यह साफ हो गया कि सात चरणों का चुनाव वह भी इस गर्मी में एक कठिन काम है।