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हेमंत के बदले चंपई सोरेन होंगे मुख्यमंत्री

ईडी वनाम सरकार का खेल अभी भी जारी है


  • हाईकोर्ट में ऑनलाइन याचिका दायर की गयी

  • राज्यपाल ने विधायकों से मिलने से इंकार कर दिया

  • जमीन के मामले में गिरफ्तारी नहीं होतीः सुबोध कांत


राष्ट्रीय खबर

रांचीःदिन भर की गहमागहमी के  बाद अंततः रात करीब साढ़े आठ बजे हेमंत सोरेन की हिरासत में लिये जाने की सूचना बाहर आयी। वैसे अब तक ईडी ने बड़ी चालाकी से औपचारिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है। दूसरी तरफ राजभवन और भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए महागठबंधन के विधायकों ने चंपई सोरेन को अपना नेता चुनकर राजभवन में दावा भी पेश कर दिया है। खबर के मुताबिक सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ राज भवन जाने वालों में हिरासत में लिये गये हेमंत सोरेन भी शामिल थे।

दूसरी तरफ इस बात की भी जानकारी मिली है कि हेमंत सोरेन की जमानत के लिए हाईकोर्ट में एक ऑनलाइन याचिका दायर की गयी  है। राज्य के महाधिवक्ता ने देर रात तक इस बारे में अपनी टीम से विचार विमर्श किया। माना जा रहा है कि खुद मुख्य न्यायाधीश ही इस याचिका पर सुनवाई करेंगे। दूसरी तरफ ईडी के हवाले से बिना किसी औपचारिक नाम के यह सूचना मीडिया तक पहुंचायी गयी  है कि फिलहाल हेमंत सोरेन को दिल्ली ले जाने की कोई योजना नहीं है। उन्हें यहीं पर अस्थायी कैंप जेल में रखा जाएगा।

दूसरी तरफ ईडी के अफसरों पर हेमंत सोरेन द्वारा एससी एसटी एक्ट में दर्ज प्राथमिकी पर फिलहाल कोई प्रगति नहीं बतायी गयी है। पर कानून के जानकार मानते हैं कि राज्य सरकार वनाम केंद्र सरकार के इस टकराव की वजह से ईडी के अफसर भी कभी भी हिरासत में लिये जा सकते हैं क्योंकि यही कानूनी प्रावधान है। इसलिए दोनों तरफ से अभी शह और मात का खेल जारी रहने की उम्मीद है।

आज भी करीब सात घंटे तक पूछताछ करने के बाद ईडी ने उन्हें हिरासत में लिया है। दूसरी तरफ जानकार बताते हैं कि ईडी ने उनकी गिरफ्तारी की तैयारी पहले ही कर ली थी और वारंट भी ले रखा था, जिसे अब तक छिपाया गया था। हेमंत सोरेन की तरफ से उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने की भनक मिलने के बाद आनन फानन में गिरफ्तारी की कार्रवाई की गयी है।

ईडी ने इसी वारंट की वजह से हेमंत सोरेन के दिल्ली आवास पर छापा मारा था और दो वाहन सहित नकदी बरामद होने की अपुष्ट सूचना मीडिया तक पहुंचायी थी। अब बिना हेमंत सोरेन की मौजूदगी के वहां की तलाशी लेना और बरामदगी दर्शाना ईडी के लिए भी रांची में दर्ज मामले की वजह से भारी पड़ सकता है।

वैसे सुबह से सूत्रों के हवाले से सूचनाएं सार्वजनिक करने के बाद झामुमो की राज्यसभा सांसद महुआ मांझी और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने पहली बार औपचारिक तौर पर हेमंत सोरेन के बदले चंपई सोरेन को सत्ता पक्ष का नेता चुने जाने का एलान किया।

इस पूरे मामले में राजनीति का खेल तब स्पष्ट हो गया जब राज्यपाल ने सत्ता पक्ष के विधायकों से मिलने से इंकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ हेमंत सोरेन से उनका त्यागपत्र लिया। राज्यपाल राधाकृष्णन पहले भी कई अवसरों पर अपने भाषणों से अपनी इच्छा व्यक्त कर चुके है। रात को पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत ने इस  पूरे घटनाक्रम को भाजपा की साजिश बताया और कहा कि जबरन हेमंत सोरेन से इस्तीफा दिलाया जा रहा है। जो मामले सामने आये हैं, वह जमीन से जुड़ा सिविल केस का मामला है और सिविल मैटर के मामलों में किसी की गिरफ्तारी पहली बार देखी जा रही है। इससे साफ है कि गैर भाजपा सरकारों के साथ केंद्र सरकार क्या करना चाहती है।