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कारगर एडीजी सुशील खोपड़े का चुनाव के पहले ही तबादला क्यों

बिहार एसटीएफ : चार साल में 321 इनामी नक्सली

और 1615 इनामी अपराधी हुए गिरफ्तार

  • अफसरशाही में हो रही है इसकी चर्चा

  • डीजीपी की नाराजगी से लिया फैसला

  • भागलपुर में पुलिसिंग में किये प्रयोग

दीपक नौरंगी

पटनाः बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी (1995 बैच) सुशील खोपड़े का एसटीएफ में सवा चार साल का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा रहा। सुशील खोपड़े पहले बिहार एसटीएफ में आईजी थे और फिर प्रमोशन पाकर वहीं एडीजी बने। उनके कार्यकाल में बिहार एसटीएफ के नाम कई उपलब्धि है।

सरकार के जिम्मेदार आईएएस और आईपीएस खूब चर्चा हो रही है कि डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी किसी एक बात को लेकर उनसे नाराज हुए और उसके बाद एडीजी सुशील खोपड़े का तबादला एसटीएफ से कर दिया गया। प्रशासनिक और पुलिस महकमें पर्दे के पीछे यह चर्चा खूब हो रही है लेकिन इतनी बेहतर उपलब्धि एसटीएफ की फिर तबादला क्यों? आईपीएस में काम में एक चर्चा और हो रही है कि इससे पहले एडीजी स्तर के आईपीएस पदाधिकारी कमल किशोर सिंह डीजीपी से काफी करीबी थे लेकिन अचानक उनको हटाकर सिविल डिफेंस भेज दिया गया।

एसटीएफ एडीजी से उन्हें एडीजी मध निषेध विभाग की नई जिम्मेदारी दे दी गई है पुलिस मुख्यालय में तैनात आईपीएस पदाधिकारी की चर्चाओं पर भरोसा करें तो पुलिस मुख्यालय में करीब 5 से 7 वर्षों तक एक ही पद पर कई एडीजी स्तर के पदाधिकारी की पोस्टिंग है तो ऐसे में सिर्फ एडीजी एसटीएफ को ही क्यों हटाया गया।

2019 से लेकर 2023 तक 14 बड़े नक्सली और अपराधियों को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। इसमें पसराहा थानेदार की हत्या में शामिल दियारा का आतंक दिनेश मुनि भी शामिल हैं। 2019 से लेकर 2023 तक बिहार एसटीएफ ने 321 इनामी नक्सली और 1615 इनामी अपराधियों की गिरफ्तार कर कीर्तिमान स्थापित किया है। एसटीएफ की यह उपलब्धि बिहार में सुशासन का राज कायम करने में सहायक हुआ है।

भागलपुर आईजी रहते हुए सुशील खोपड़े ने रेंज की पुलिसिंग में कई प्रयोग किये थे। इससे जनता लोगों से जुड़ी और पुलिस की छवि भी बदली थी। नवगछिया पुलिस जिले के झंडापुर में ट्रिपल मर्डर के दौरान तत्कालीन भागलपुर आईजी सुशील खोपड़े के नेतृत्व में पुलिस ने गुणवत्ता पूर्ण अनुसंधान किया और कोर्ट से दोषियों को सजा दिलाई थी।

वहीं वारदातों के लिए जाना जाने वाला भागलपुर जिले में कई अपराधियों की गिरफ्तारी हुई थी। नाथनगर हुए सांप्रदायिक दंगे में सुशील खोपड़े खुद रात भर थाने में मौजूद रहकर इलाके में अमन-चैन कायम करवाया था।  2022 में गणतंत्र दिवस के मौके पर विशिष्ट और सराहनीय सेवा के लिए बिहार के 16 पुलिस पदाधिकारियों को मेडल मिला था।

इसमें विशिष्ट सेवा के लिए बिहार कैडर के आईपीएस व तत्कालीन एडीजी ऑपरेशन सुशील मानसिंह खोपड़े को राष्ट्रपति पुलिस मेडल मिला था। वहीं 2018 में इन्हें वीरता पुलिस पदक भी मिला था। शाहाबाद के डीआईजी रहते हुए सुशील मान सिंह खोपड़े के नेतृत्व में बिहार से कुख्यात अपराधी सुरेश राजभर के साथ मुठभेड़ हुआ था। इसमें पुलिस ने सुरेश राजभर को मार गिराया था। अपराधियों की फायरिंग के बाद एसटीएफ ने आपरेशन को आगे बढ़ाया। सुरेश व उसके छह साथियों को टीम ने मार गिराया। शाहाबाद के तत्कालीन डीआइजी सुशील खोपड़े के नेतृत्व में पूरा ऑपरेशन हुआ था।