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अपनी बात पर खरे उतरे मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की संख्या घटायी


राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि 2023 में मामलों के पंजीकरण से अधिक निपटान किया गया है। शीर्ष अदालत का कहना है कि उसने 2023 में जनवरी से दिसंबर के बीच 52,191 मामलों का फैसला किया, जबकि इस अवधि के दौरान 49,191 मामले दर्ज किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुरुवार को जारी एक विस्तृत बयान में कहा गया है कि 2023 में मामलों के निपटान की दर अभूतपूर्व रही है। कोर्ट ने कहा कि उसने इस साल 1 जनवरी से 15 दिसंबर के बीच दर्ज मामलों से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है।

अदालत द्वारा दिखाए गए आंकड़ों में कहा गया है कि उसने 2023 में जनवरी और दिसंबर के बीच 52,191 मामलों का फैसला किया, जबकि इस अवधि के दौरान 49,191 मामले दर्ज किए गए थे।

अदालत ने कहा, वर्ष 2017 में आईसीएमआईएस [एकीकृत मामला प्रबंधन सूचना प्रणाली] लागू होने के बाद से निपटान संख्या के मामले में सबसे अधिक है। मुख्य न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ ने पदभार ग्रहण करने के बाद ही लंबित मामलों पर चिंता जताते हुए इनकी संख्या कम करने की बात कही थी। अब आंकड़ों के जरिए यह बताया गया कि शीर्ष अदालत ने इस दिशा में अच्छा काम किया है।

बयान में कहा गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के कार्यकाल में एक बेंच के समक्ष न्यायिक सुनवाई के लिए मामलों को सूचीबद्ध करने के लिए आवश्यक समय-सीमा को सुव्यवस्थित किया गया। मामले दाखिल होने के पांच दिनों के भीतर सूचीबद्ध किए गए, जबकि पहले इसके लिए 10 दिन की आवश्यकता होती थी।

अदालत ने कहा, जमानत, बंदी प्रत्यक्षीकरण, बेदखली, विध्वंस और अग्रिम जमानत में मामलों को एक दिन में संसाधित किया गया और स्वतंत्रता के अधिकार को सर्वोच्च स्थान पर रखते हुए तुरंत अदालतों में सूचीबद्ध किया गया। सुनवाई के लिए विशेष पीठों का गठन किया गया, जिनमें मृत्युदंड से संबंधित पीठें भी शामिल थीं।

तीन जजों की बेंचें 166 बैठकों तक बैठीं। पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के लंबित मामलों की संख्या 36 से घटकर 19 हो गई। मुख्य न्यायाधीश ने स्वयं विभिन्न पांच-न्यायाधीशों की पीठ के मामलों की 71 बैठकों की अध्यक्षता की थी।