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रोहिंग्या घुसपैठ का गलियारा बना असम: सरमा

  • असम के डीजीपी ने उल्फा आई को दी चुनौती

  • निर्दोष जनता को मारना बंद कर यह संगठन

  • उल्फा ने कहा एक सप्ताह बिना सुरक्षा घूमें

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देशभर में कम से कम 48 लोगों को गिरफ्तार करके रोहिंग्या घुसपैठ के मुद्दे पर कार्रवाई करने के लिए राज्य पुलिस और एनआईए के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि रोहिंग्याओं की घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। असम को गलियारे के रूप में इस्तेमाल सुरक्षाबलों ने विफल कर दिया है। हम उपलब्ध संसाधनों में कड़ी निगरानी कर रहे हैं। इनके नापका मंसूबों का खत्म कर देंगे। वेल डन!

खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण के निदेशक दिनकर गुप्ता के साथ बातचीत के बाद यहां शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने सुरक्षा संबंधी मामलों पर चर्चा की।एनआईए के निदेशक ने मुख्यमंत्री को रोहिंग्या घुसपैठ मुद्दे के बारे में जानकारी दी, जिसमें असम ने मामला दर्ज किया था और एजेंसी ने पूर्वोत्तर में 44 स्थानों पर छापे मारे थे।

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा (आई) (कट्टरपंथी गुट) के साथ गंभीरता से बातचीत कर रही है, जबकि अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले वार्ता समर्थक उल्फा गुट के साथ शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है और इस पर इसी महीने या जनवरी में हस्ताक्षर होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वार्ता समर्थक उल्फा समूह के साथ शांति समझौते में राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सुरक्षा उपायों के साथ-साथ भूमि अधिकार भी शामिल होंगे।

परेश बरुआ गुट के प्रति सदभावना

बरुआ के नेतृत्व वाले गुट के प्रति सद्भावना जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा विकास को बाधित करेगी और यह राज्य और उसके लोगों के बड़े हित में है कि उल्फा (आई) हमेशा के लिए सौहार्दपूर्ण समाधान पर आए। उन्होंने कहा,हिंसा निरर्थक है और यह विकास की घड़ी को पीछे धकेल देगी। यह ऐसे समय में माहौल को खराब कर देगी, जब असम राज्य में निवेश बढ़ रहा है। सरमा और आईबी एवं एनआईए के निदेशकों के बीच यहां असम भवन में बैठक हुई और यह एक घंटे से अधिक समय तक चली। वर्तमान में पूर्वोत्तर मामलों पर सरकार के सलाहकार आईबी के पूर्व विशेष निदेशक एके मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

असम के विशेष डीजीपी हरमीत सिंह ने कहा कि बिचौलियों का एक गिरोह बांग्लादेश से रोहिंग्या लोगों को अवैध रूप से लाने के लिए असम और त्रिपुरा को गलियारे के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। मानव तस्करी से जुड़े बिचौलिये भारत से बांग्लादेश तक फैले हुए हैं।

दूसरी ओर, असम के पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) को पिछले 23 दिनों के दौरान बम विस्फोटों की तीन घटनाओं को लेकर चेतावनी दी है।

वे हमेशा मेरा नाम लेते हैं। अगर उन्हें कोई समस्या है तो वे मुझे निशाना बना सकते हैं। मैं काहिलीपारा में रहता हूँ और गुवाहाटी में मेरा एक कार्यालय है। वे मुझ पर हमला करते हैं। आप यहां-वहां ग्रेनेड फेंककर आम लोगों को परेशान क्यों कर रहे हैं? दरअसल, धमाका 15 दिसंबर की शाम जोरहाट मिलिट्री स्टेशन के पास हुआ था।

विस्फोट की जांच कर रही एजेंसियां

इससे पहले 9 दिसंबर को शिवसागर में सीआरपीएफ कैंप के पास और 22 नवंबर को तिनसुकिया में आर्मी कैंप के पास दो और धमाके हुए थे। इस बीच, असम के पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह द्वारा प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) को चुनौती देते हुए कहा गया कि अगर वह खतरा पैदा करता है तो उन्हें निशाना बनाया जाए, लेकिन संगठन ने अब इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है और शीर्ष पुलिस अधिकारी से एक सप्ताह तक बिना सुरक्षा के गुवाहाटी में स्वतंत्र रूप से घूमने को कहा है।

एन आई ए ने आज असम के जोरहाट में विस्फोट स्थल पर जांच की। हालांकि विस्फोट के स्रोत का अभी पता नहीं चल पाया है। गौरतलब है कि ऊपरी असम में तीन अलग-अलग स्थानों पर बम विस्फोटों की घटनाएं हुईं, जिससे राज्य में सुरक्षा परिदृश्य पर सवाल खड़े हो गए। खासकर ऐसे समय में जब इसे अगले साल जनवरी में गणतंत्र दिवस की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन बम धमाकों की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। घटना की जांच पहले एनआईए को सौंपी गई थी।