Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष भेजने के लिए नया अंतरिक्ष यान, देखें वीडियो Make in India Security Breach: स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के साथ खिलवाड़; सप्लायर कंपनी पर HAL की सख्... Surat Police Bravery: सूरत पुलिस ने दिखाई दरियादिली; जहर खाने वाले युवक को 7वीं मंजिल से सुरक्षित बच... Mamata Banerjee FIR: ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें; भड़काऊ बयान के मामले में कोलकाता में दर्ज हुई FIR Bikram Majithia vs Sanjay Singh: सुप्रीम कोर्ट से मजीठिया को झटका; मानहानि मामले में अतिरिक्त गवाह ब... Jammu-Kashmir Border Alert: घुसपैठ की साजिश! कठुआ सेक्टर में जैश आतंकियों की सक्रियता, हाई अलर्ट पर ... Supreme Court on Officer Dispute: रोहिणी सिंदूरी और डी रूपा मौदगिल विवाद; SC ने जस्टिस कुरियन जोसेफ ... पेंटागन में अचानक बज उठा था एन्थेक्स का अलार्म टेंडर सिंडिकेट पर शिकंजा: प्रशासनिक तंत्र की परीक्षा बन गया PM Modi 12 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों का कार्यकाल 'जनकल्याण और सुशासन' का प्रतीक ...

पत्रकार को रिहा कर दिया हाई कोर्ट ने

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः सरकार की आलोचना करने पर न सिर्फ गिरफ्तारी हो सकती है, बल्कि कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के एक पत्रकार को रिहा कर दिया है। अदालत के इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में देश के दूसरे हिस्सों में भी सरकारी काम काज की आलोचना की वजह से कई पत्रकारों को जेल जाना पड़ा है।

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने पत्रकार सज्जाद अहमद गुल की हिरासत या गिरफ्तारी को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, केवल सरकार की आलोचना किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का आधार नहीं हो सकती। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सज्जाद पर लगे आरोपों में कोई दम नहीं है।

इसके विपरीत, अदालत ने पत्रकार को गिरफ्तार करने के लिए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।  पिछले साल 22 जनवरी को पुलिस ने सज्जाद को जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ शत्रुता को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।

उस मामले में मुख्य न्यायाधीश एन कोटेश्वर सिंह और एमए चौधरी की खंडपीठ ने कहा था कि सरकार के किसी भी फैसले या काम की आलोचना करने पर गिरफ्तारी होगी- प्रशासन को ऐसी मानसिकता नहीं रखनी चाहिए। ऐसी गिरफ़्तारियाँ कानून के दुरुपयोग के अलावा और कुछ नहीं हैं।

हाई कोर्ट ने कहा कि यह दलील कहीं नहीं दी गई कि सजा की खबर सच्ची और झूठी है। यहां तक ​​कि उनकी खबर से राज्य की सुरक्षा प्रभावित होने का भी कोई विशेष आरोप नहीं है। इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सजा की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने उनकी हिरासत में कोई दखल नहीं दिया। जम्मू-कश्मीर के पत्रकार ने फैसले को चुनौती देते हुए खंडपीठ में अपील की। उनकी याचिका पर दो जजों की बेंच ने जवाब दिया। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने गिरफ्तारी का आदेश खारिज कर दिया।