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जनवरी के तीसरे सप्ताह होगा श्रीराम मंदिर का उदघाटन

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर राम मंदिर के उद्घाटन दिवस की घोषणा की। उन्होंने कहा, राम मंदिर की एक मंजिल का काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 20 से 24 जनवरी के बीच किसी शुभ मुहूर्त में मूर्ति में प्राणप्रतिष्ठा होगी।

दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन करना चाहती है। इसी उद्देश्य से प्रयास किये जा रहे हैं। राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट ने अगस्त में जानकारी दी थी कि राम मंदिर का उद्घाटन जनवरी में किया जाएगा। उस वक्त कयास लगाए जा रहे थे कि यह आयोजन 15 जनवरी से 24 जनवरी 2024 के बीच एक ही दिन आयोजित किया जाएगा।

आखिरकार ट्रस्ट के मुखिया ने मंदिर के उद्घाटन की तारीख की घोषणा कर दी। दरअसल लोकसभा चुनाव के पहले कई किस्म की चुनावी परेशानियों के बीच इस मंदिर के जरिए नरेंद्र मोदी फिर से अपने हिंदू वोट बैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त, 2020 को अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखी। पिछले साल मई में मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार ने निर्माणाधीन राम मंदिर की तस्वीर दिखाई थी और बताया था कि मंदिर के दरवाजे अगले साल खोले जाएंगे। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट ने जानकारी दी कि उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद रहेंगे।

श्री मिश्र ने कहा कि रामलला की मूर्ति 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। संयोग से, जब 10 सितंबर को जी20 राष्ट्राध्यक्षों की दिल्ली में बैठक हुई, तो राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के नेताओं ने राम मंदिर के उद्घाटन की अंतिम तारीख तय करने के लिए अयोध्या में बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, उस बैठक में फैसला लिया गया कि 22 जनवरी के शुभ दिन पर मंदिर का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया जाएगा।

नब्बे के दशक की शुरुआत में बीजेपी-आरएसएस ने प्रधानमंत्री वीपी सिंह की मंडल राजनीति के खिलाफ कमंडलु राजनीति शुरू की थी। कांसीराम, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद के दलित, ओबीसी ने जाति के बावजूद पूरे हिंदू समुदाय को एकजुट करने के लिए भाजपा-आरएसएस राम मंदिर आंदोलन शुरू किया। ऐसा माना जाता है कि इसी परिसर में सात और मंदिर बनाने का निर्णय लोकसभा चुनाव से पहले हिंदू वोट को मजबूत करने के लिए लिया गया था। इन सात मंदिरों में महर्षि वाल्मिकी, शबरी, निषादराज, अहिल्या, वशिष्ठ, विश्वकर्मा और अगस्त्य मुनि की पूजा की जाएगी। दरअसल भाजपा ओबीसी मुद्दे पर लग रही आंच को भी इन मंदिरों के जरिए कम करना चाहती है।