Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
🚨 लातूर के औसा में स्कूल में वीडियो बनाने पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर FIR दर्ज लखनऊ KGMU में MBBS इंटर्न्स की भूख हड़ताल: ₹12,000 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड करने की मांग, गेट पर ... बेंगलुरु के डोड्डाबल्लापुर में बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान स्थित गैंग से जुड़े 28 वर्षीय AC टेक्नीशियन ... बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक: वंदे मातरम् पर देशव्यापी अभियान का ऐलान, Gen Z से जुड़ेंगे ... जयपुर में जर्जर स्कूल पर एक्शन: पुराने भवन से 50 मीटर दूर ग्रामीण के मकान में शिफ्ट हुई कक्षाएं, 16 ... संभाजीनगर ट्रिपल डेथ केस: आईफोन की जिद या कोई और वजह? DCP रत्नाकर नवले बोले- जांच पूरी होने तक अफवाह... बिहार के DMCH में अमानवीयता की हद: गार्ड ने टूटे पैर वाले लावारिस मरीज को जमीन पर घसीटा, अधीक्षक ने ... 71 की उम्र में मेगास्टार चिरंजीवी का बॉक्स ऑफिस पर दबदबा, संक्रांति 2027 पर रिलीज होगी 'काका' पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर NIA का शिकंजा: लाहौर भेजा जाएगा समन, गैर-मौजूदगी में चलेगा ट... 'मर्द औरतों को कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं?': राहुल गांधी ने पुणे में छात्राओं से किया सीधा संवाद, ...

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर नई बहस प्रारंभ

  • एडीआर की तरफ से दायर हुई है याचिका

  • अभी सिर्फ पांच मतदान केंद्रों की व्यवस्था

  • कई विरोधी दल गड़बड़ी का आरोप लगा चुके

नयी दिल्ली: चुनाव आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से वोटर वेरिफÞएिबल पेपर आॅडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पर्चियों का 100 फीसदी सत्यापन की मांग वाली याचिका का उच्चतम न्यायालय के समक्ष विरोध किया है। चुनाव आयोग ने एसोसिएशन आॅफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की याचिका पर एक हलफनामा दायर करके कहा कि शत-प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों की गिनती ईवीएम के उपयोग की भावना के खिलाफ होगी।

इसका मतलब पुराने पेपर बैलेट व्यवस्था पर वापस लौटना होगा। चुनाव आयोग ने 469 पन्नों के एक बड़े हलफनामे में यह भी दावा किया कि वीवीपैट के माध्यम से यह सत्यापित करने का मतदाताओं का कोई मौलिक अधिकार नहीं है कि उनका वोट डाले गए वोट के रूप में दर्ज किया गया और रिकॉर्ड किए गए वोट के रूप में गिना गया।

चुनाव आयोग ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से ईवीएम की गिनती और वीवीपैट पर्चियों की गिनती के बीच विसंगति हो सकती है। यानी लेकिन व्यावहारिक रूप से वीवीपैट पर्चियों की गिनती में मानवीय त्रुटि को छोड़कर। लेकिन ईवीएम की गिनती और वीवीपैट पर्चियों की गिनती के बीच किसी भी विसंगति की संभावना नहीं हो सकती है।

इस महीने की चार तारीख को शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में एडीआर की याचिका को गलत बताते हुए आगे कहा गया, चुनाव संचालन नियम 1961 के प्रावधान किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करते हैं। वास्तव में संबंधित प्रावधानों की कई मौकों पर न्यायिक जांच हुई और उनकी संवैधानिकता को बार-बार बरकरार रखा गया है।

एसोसिएशन आॅफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में सभी मतदान केंद्रों के वीवीपैट के साथ ईवीएम में गिनती को सत्यापित करने की गुहार लगाई गई है। फिलहाल, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों पर  सत्यापन की व्यवस्था है।