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कुकी पीपुल्स एलायंस ने वीरेन सरकार से समर्थन वापस लिया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हिंसा पीड़ित मणिपुर में अब कुकी पीपुल्स एलायंस ने एन वीरेन सिंह की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इससे अब वहां सरकार के अंदर उथल पुथल मचने की संभावना है। इस एलायंस के सिर्फ दो ही विधायक हैं, जिन्होंने इस सरकार को समर्थन दिया था। लेकिन इस एक संगठन के समर्थन वापसी के बाद भाजपा के कुकी विधायक तनाव की स्थिति में हैं और अगर उन्होंने सामाजिक दबाव में समर्थन वापस ले लिया तो सरकार अल्पमत में भी आ सकती है।

दंगों से मणिपुर में हिंसा तो मची ही, राजनीतिक हालात भी उथल-पुथल होने लगे। विपक्ष ने पहले वहां के मुख्यमंत्री पद से बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग की थी। तब एनडीए गठबंधन में सहयोगी कुकी पीपुल्स अलायंस ने मणिपुर में बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। जो निस्संदेह मणिपुर की हालिया राजनीतिक स्थिति में एक बड़ी घटना है।

मणिपुर में जातीय दंगों के कारण अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कुछ दिन पहले एक वायरल वीडियो में मणिपुर की सड़कों पर दो महिलाओं को नग्न अवस्था में घुमाते हुए दिखाया गया था। इस अमानवीयता की देशभर में निंदा हुई। अनेक अच्छे समाज के लोगों ने हुंकार भरी। प्रधानमंत्री और मणिपुर के मुख्यमंत्री ने संबोधित किया।

लेकिन अभी भी मणिपुर अशांत है। शुक्रवार तड़के बिष्णुपुर में एक घर के अंदर सो रहे तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मणिपुर में हालात फिर उग्र हो गये। इसके बाद केंद्र ने शनिवार रात अर्धसैनिक बलों की 10 कंपनियां मणिपुर भेजीं। ऐसे में कुकी पीपुल्स अलायंस का बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेना एनडीए के लिए बड़ा झटका है। वहीं मणिपुर मुद्दे पर दिल्ली संसद में केंद्र सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है।

अनास्तासिया की चर्चा होने वाली है, वहां कुकी पीपुल्स एलायंस की कार्रवाई काफी प्रासंगिक है। इस बीच कुकी पीपुल्स एलायंस ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘मौजूदा तनाव पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद, मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली मणिपुर की वर्तमान सरकार को निरंतर समर्थन अब फलदायी नहीं है। ऐसे में, मणिपुर सरकार को केपीए का समर्थन वापस लिया जाता है और इसे अमान्य माना जा सकता है।

गौरतलब है कि मणिपुर में संघर्ष पिछले 3 मई को मणिपुर में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ से शुरू हुआ था। मूल रूप से, मैतेई और कुकी कुलों के बीच संघर्ष ने खूनी मोड़ लेना शुरू कर दिया। एन बीरेन सिंह द्वारा शासित मणिपुर जलने लगा। तीन महीने बाद भी मणिपुर में शांति नहीं लौटी। मूल रूप से, आरक्षित वन के पास कुकी गांवों के स्थानांतरण को लेकर संघर्ष बढ़ गया। संयोग से, गणना के अनुसार, मणिपुर की 53 प्रतिशत आबादी मैतेई है। और उनमें से ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। और नागा, कुकी वहां की आबादी का 40 फीसदी हिस्सा हैं। ये वहां के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं।