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दो लफ्जों की है दिल की .. .. .. ..

दो लफ्ज भी नहीं बोल पा रहे हैं भारत के प्रधानमंत्री। यह उनके चरित्र के अंदर की झलक है। वरना उन्होंने ही कभी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को मौन मोहन कहा था। अब पेगासूस, अडाणी तथा मणिपुर के मुद्दे पर मौन कौन है, यह तो देश देख समझ रहा है। इसी वजह से भाजपा का भी यह हाल हो गया है कि चूंकि नरेंद्र मोदी नहीं बोल रहे हैं तो दूसरे नेता भी चुप है। जिस दिन नरेंद्र मोदी बोलेंगे, उसके बाद से बाकी लोगों की जुबान भी खुल जाएगी। अभी तो सिर्फ मणिपुर के साथ साथ अन्य राज्यों का उल्लेख कर उन्होंने नीचे से ऊपर तक यह संकेत दिया है कि कितना और क्या बोलना है।

मैडम सिलिंडर रानी अचानक संसद में गर्म हो गयी। इतने दिनों तक मैडम ने सिलिंडर पर एक शब्द भी नहीं कहा था जबकि पहले वह सिलिंडर के दाम बढ़ने पर तांडव जैसा करने लगती थी। यह दोहरा चरित्र देश का मैंगो मैन देख रहा है और समझ भी रहा है। मणिपुर का मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया है।

यानी इस मुद्दे पर एक दलील तैयार कर ली गयी है कि मामले की जांच चल रही है, इसलिए उस पर बोलना मुनासिब नहीं होगा। अरे भाई देश के इस मैंगो मैन की जमात को एकदम बुद्धू समझते हो क्या। सब समझ रहे हैं कि एन बीरेन सिंह को टिकाये रखने के पीछे का असली एजेंडा क्या है। कभी चीन को लाल आंख दिखाने की बात करते थे तो अब आठ माह बाद राज खुला कि साहब बहादुर को चीन के राष्ट्रपति से हाथ मिलाकर बात कर आये थे।

देश को इस बारे में भी बताने की जहमत नहीं उठायी कि आखिर हाथ मिलाकर बात क्या किया। यह तय है कि अविश्वास प्रस्ताव परास्त होगा लेकिन साहब को बोलना पड़ेगा, यह बड़ी बात है। भाई लोगों ने साजिश के तहत इंडिया बना दिया तो अब मजबूरी में संविधान से इंडिया शब्द हटाने की मांग होने लगी है।

वैसे चुनाव आते आते इंडिया रहेगा या चला जाएगा, इस बारे में अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। ईडी निदेशक को 45 दिनों का कार्यविस्तार मिला है। इस बीच कई और नेताओँ के खिलाफ ईडी की कार्रवाई हुई तो पता नहीं कितने टिक पायेंगे। यही भारतीय राजनीति का सच है जो यह बताता है कि हर नेता अपने बेटा बेटी को राजनीति में क्यों स्थापित करने के लिए पापड़ बेलता है। इस आरोप से अपने साहब बहादुर मुक्त हैं पर अडाणी का मसला गले में कांटा की तरह फंस गया है।

इसी बात पर प्रसिद्ध फिल्म द ग्रेट गैंबलर का एक गीत याद आ रहा है। इसे लिखा था आनंद बक्षी ने और संगीत में ढाला था राहुल देव वर्मन ने। इस गीत की विशेषता यह भी है कि इसे आशा भोंसले और शरद कुमार के सात खुद अमिताभ बच्चन ने गाया है। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

दो लफ़्ज़ों की है, दिल की कहानी

या है मोहब्बत, या है जवानी

दिल की बातों का मतलब न पूछो

कुछ और हमसे बस अब न पूछो

जिसके लिये है, दुनिया दीवानी

या है मोहब्बत, या है है जवानी

इस ज़िंदगी के, दिन कितने कम है

कितने है ख़ुशियाँ, और कितने ग़म हैं

लग जा गले से, रुत है सुहानी

या है मोहब्बत, या है जवानी

ये कश्ती वाला, क्या गा रहा है

कोई इसे भी, याद आ रहा है

जिसके लिये है, दुनिया दीवानी

या है मोहब्बत, या है जवानी

दो लफ़्ज़ों की है, दिल की कहानी

या है मोहब्बत, या है जवानी।

कुछ शायद बोलने की हिम्मत भी कर लेते तो विरोधियों ने साजिश कर इंडिया बना लिया। अब उसका चुनावी टेंशन अलग से बढ़ गया है। वइसे ही साहब लगातार इलेक्शन मोड में ही रहते हैं। अइसे में टेंशन से तो चुनावी मोड का पारा और ऊपर चढ़ गया है। जहां भी जा रहे हैं विरोधियों को पानी पी पीकर कोस रहे हैं।

अब सुना है कि नया एक और टेंशन आने वाला है। राहुल गांधी का दिमाग सॉरी घुटना का ईलाज केरल में चल रहा है। वहां से आने के बाद फिर से भारत जोड़ो यात्रा की दूसरी कड़ी प्रारंभ करेंगे। पहली यात्रा का मजाक उड़ाना महंगा पड़ गया था। अब तो पहले दौर का अनुभव लिए हुए एक बड़ी टीम भी है।

पता नहीं क्योंकि लोकसभा चुनाव से पहले इतना टेंशन दे रहे हैं। अजी साहब दो लफ्ज बोल ही देते तो इतना सारा झंझट तो नहीं होता। अब आपका अहंकार अगर सर चढ़कर बोल रहा है को देश का आम आदमी क्या कर सकता है। हम तो सिर्फ सलाह ही दे सकते हैं कि जिस तरह मनमोहन सिंह ने निर्भया कांड के बाद माफी मांगी थी। आप भी माफी मांग ही लो। पहले अटल बिहारी बाजपेयी थे तो आपको बचा लिया था। अब तो आपके जिम्मे पूरी पार्टी है।