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चंद्रयान 3 का सफल प्रक्षेपण देश ने देखा

  • इस घटना को लाखों ने लाइव देखा

  • प्रधानमंत्री ने ट्विट से जारी किया संदेश

  • कई सप्ताह में चांद तक की दूरी तय करेगा यान

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के लिए देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए आज कहा कि यह मिशन भारत की आशाओं एवं सपनों को आगे बढ़ाएगा। श्री मोदी ने ट्वीटर पर कई ट्वीट के माध्यम से जारी संदेश में कहा कि जहां तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का सवाल है, 14 जुलाई 2023 हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा।

चंद्रयान-3, हमारा तीसरा चंद्र मिशन, अपनी यात्रा शुरू करेगा। यह उल्लेखनीय मिशन हमारे देश की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि कक्षा उत्थान प्रक्रिया के बाद चंद्रयान-3 को चंद्र स्थानांतरण प्रक्षेप पथ में डाला जाएगा। 300,000 किमी से अधिक की दूरी तय करते हुए, यह आने वाले हफ्तों में चंद्रमा पर पहुंचेगा।

जहाज पर मौजूद वैज्ञानिक उपकरण चंद्रमा की सतह का अध्ययन करेंगे और हमारे ज्ञान को बढ़ाएंगे। श्री मोदी ने वैज्ञानिकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा, हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद, अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का इतिहास बहुत समृद्ध है। चंद्रयान-1 को वैश्विक चंद्र मिशनों में एक पथप्रदर्शक माना जाता है क्योंकि इसने चंद्रमा पर पानी के अणुओं की मौजूदगी की पुष्टि की है। यह दुनिया भर के 200 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों में प्रकाशित हुआ था।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-1 तक, चंद्रमा को एक हड्डी-सूखा, भूवैज्ञानिक रूप से निष्क्रिय और निर्जन खगोलीय पिंड माना जाता था। अब, इसे पानी और उप-सतह बर्फ की उपस्थिति के साथ एक गतिशील और भूवैज्ञानिक रूप से सक्रिय निकाय के रूप में देखा जाता है। हो सकता है कि भविष्य में इस पर संभावित रूप से निवास किया जा सके।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 भी उतना ही अग्रणी था क्योंकि इससे जुड़े ऑर्बिटर के डेटा ने पहली बार रिमोट सेंसिंग के माध्यम से क्रोमियम, मैंगनीज और सोडियम की उपस्थिति का पता लगाया था।

इससे चंद्रमा के जादुई विकास के बारे में अधिक जानकारी भी मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान 2 के प्रमुख वैज्ञानिक परिणामों में चंद्र सोडियम के लिए पहला वैश्विक मानचित्र, क्रेटर आकार वितरण पर ज्ञान बढ़ाना, आईआईआरएस उपकरण के साथ चंद्र सतह के पानी की बर्फ का स्पष्ट पता लगाना और बहुत कुछ शामिल है। यह मिशन लगभग 50 प्रकाशनों में प्रकाशित हुआ है। श्री मोदी ने चंद्रयान-3 मिशन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा, मैं आप सभी से इस मिशन और अंतरिक्ष, विज्ञान और नवाचार में हमने जो प्रगति की है, उसके बारे में और अधिक जानने का आग्रह करता हूं। इससे आप सभी को बहुत गर्व महसूस होगा।

एचईसी द्वारा लॉंचपैड बनाने की कहानी

आज जब पूरे देश की निगाहें चंद्रयान 3 के लांचिंग पर टिकी हुई है, हर देशवासी प्रक्षेपण की सफल कामना कि दुआये और गौरवान्वित महसूस कर रहा है उसी समय एचईसी के अधिकारी और कर्मचारीगण भी अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे है क्योंकि एचईसी द्वारा निर्मित लॉचपेड से चंद्रयान 3 का प्रक्षेपण हो रहा है।

लगभग 2005-06 के दौरान जब हमारे पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय APJ कलाम साहब लॉंच पैड बनाने के दिशा में कार्य कर रहे थे उसी दरम्यान जर्मनी और अमेरिका के विदेश दौरे में वहाँ के कुछ वैज्ञानिकों के द्वारा एचईसी का नाम सुझाया गया। तब 2008 के दरम्यान उन्होंने एचईसी का दौरा किया और एचईसी के कार्यक्षमता और तकनीकी कुशलता को देखते हुए पहले तो वो दंग हुए और उसके बाद इसरो से मोबाइल लांचिंग पैड का कार्यदेश एचईसी को प्राप्त हुआ। कलाम साहब के सार्थक प्रयास और मार्गदर्शन में एचईसी ने मोबाइल लांचिंग पैड, एफ़सीवीआरएस, हॉरिजेंटल स्लाइडिंग डोर(एचआरडी),मोबाइल लांचिंग पेडस्टल और हैमर हेड टावर क्रेन इत्यादि का सफलता पूर्वक एवं नियत समय में निर्माण किया और देश को समर्पित किया।

कलाम साहब ने एचईसी के आधारभूत संरचना को देखते हुए यह कहा कि दूसरा एचईसी दोबारा इस देश में नहीं बन सकता इसीलिए एचईसी को हर हाल में देश का धरोहर मानते हुए इसको बचाने का और निरंतर चलाने का प्रयास किया जाये।

अतः आज चंद्रयान 3 के प्रक्षेपण के दिन सभी एचईसी कर्मचारी ईश्वर से यह कामना करते है कि प्रक्षेपण सफल रहे और इसरो एवं अन्य संस्थाओं के प्रयास का सफलता पूर्वक क्रियान्वयन हो।

एचईसी द्वारा किए हुए इस अतिमहत्वपूर्ण योगदान के लिए आज सुबह 11:00 बजे एचईसी मुख्यालय पर एचईसी ऑफ़िसर्स एसोसिएशन द्वारा मीडिया बंधुओं को संबोधित किया गया एवं चंद्रयान 3 के प्रक्षेपण के साथ एचईसी का उन्नति के रास्ते पर प्रक्षेपण का कामना किया गया।