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नाटो सम्मेलन के लिए लिथुआनिया में सैन्य घेराबंदी

मिंस्कः युद्धग्रस्त यूक्रेन के काफी करीब नाटो का यह सम्मेलन लिथुआनिया में होने जा रहा है। इस  वजह से पूर्वी यूरोपीय देश लिथुआनिया में पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के शिखर सम्मेलन के आसपास कड़ी सुरक्षा बरती गई है। हालाँकि, सुरक्षा बढ़ाने के मजबूत कारण हैं। क्योंकि जिस जगह पर बैठक होगी वह जगह रूस के सहयोगी बेलारूस की सीमा से महज 32 किमी दूर है।

दूर स्थित है। जर्मनी ने पहले ही लिथुआनिया की राजधानी विनियस में पैट्रियट लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली तैनात कर दी है। यूक्रेन में जारी युद्ध को देखते हुए नाटो के इस प्रस्तावित सभास्थल को एक सैन्य किला के तौर पर घेर दिया गया है। नाटो के इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और अन्य पश्चिमी नेता 11-12 जुलाई को इसी जगह पर मुलाकात करेंगे।

बाइडन का यहां आना भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में उन्होंने यूक्रेन के बारे में टिप्पणी की है कि अभी यूक्रेन नाटो की सदस्यता लेने के लिए तैयार नहीं है। इस टिप्पणी के ठीक उलट अमेरिका ने उसे विवादास्पद क्लस्टर बम देने पर सहमति जतायी है। इस बम को दुनिया के एक सौ से अधिक देश प्रतिबंधित कर चुके हैं।

रूस ने भी अमेरिका के इस फैसले को युद्ध को भड़काने वाला बताया है।अंतर्राष्ट्रीय प्रेस के अनुसार, 16 नाटो देशों ने मंगलवार और बुधवार को शिखर सम्मेलन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुल लगभग 1,000 सैनिक भेजे हैं। क्योंकि विनियस रूस से सिर्फ 151 किलोमीटर दूर है।

इसके अलावा, स्पेन वायु रक्षा प्रणाली तैनात करने जा रहा है, होवी फ्रांस से आ रहा है, फिनलैंड और डेनमार्क लिथुआनिया में सैन्य जेट तैनात कर रहे हैं। ब्रिटेन फ्रांस के साथ ड्रोन रोधी तकनीक प्रदान कर रहा है। पोलैंड और जर्मनी ने विशेष अभियान बल भेजे। लिथुआनियाई राष्ट्रपति गीतानास नौसेदा ने कहा, सिर्फ इसलिए कि बिडेन और 40 देशों के नेता आ रहे हैं, हमारे आसमान को असुरक्षित छोड़ना मूर्खता होगी। लिथुआनिया, एस्टोनिया और लातविया के बाल्टिक राज्यों पर कभी मास्को का शासन था। लेकिन 2004 के बाद ये देश नाटो और यूरोपीय संघ में शामिल हो गये।